कोटा। शहर के सरकारी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत से जुड़े मामले में जांच समितियों की रिपोर्ट के बाद कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। अलग-अलग स्तर पर गठित जांच कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई हाई लेवल रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

जांच में सामने आया कि पांचों महिलाओं की मौत के पीछे अलग-अलग चिकित्सकीय कारण और इलाज के दौरान हुई लापरवाहियां प्रमुख रहीं। रिपोर्ट में मरीजों की स्थिति को समय पर पहचानने, सही निर्णय लेने और इलाज की प्रक्रिया में हुई चूकों को अहम माना गया है।

एक मामले में चार महीने की गर्भवती महिला को गर्भाशय (बच्चेदानी) में संक्रमण की समस्या थी। जांच के अनुसार ऐसी स्थिति में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत थी, लेकिन इलाज की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे। संक्रमण बढ़ने और जटिलताएं आने से महिला की हालत बिगड़ती गई।

दूसरे मामले में प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) को मौत की बड़ी वजह माना गया। रिपोर्ट में संकेत दिया गया कि समय पर स्थिति को नियंत्रित करने और जरूरी चिकित्सा कदम उठाने में देरी से महिला की हालत गंभीर हो गई।

जांच रिपोर्ट में अन्य मामलों में भी प्रसूताओं की गंभीर स्थिति, बीमारी की पहचान, इलाज की रणनीति और आपातकालीन प्रबंधन से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की गई। कमेटियों ने रिकॉर्ड, इलाज प्रक्रिया और डॉक्टरों की भूमिका सहित कई बिंदुओं की जांच की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले अलग-अलग जांच टीमें बनाई गई थीं। इन सभी रिपोर्टों के आधार पर हाई लेवल कमेटी ने अंतिम रिपोर्ट तैयार की है। अब सरकार स्तर पर रिपोर्ट की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।

इस घटना ने अस्पतालों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं, प्रसव के दौरान निगरानी व्यवस्था और आपातकालीन इलाज की तैयारियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार प्रसूता की स्थिति में किसी भी तरह की जटिलता होने पर तुरंत पहचान और सही समय पर उपचार बेहद जरूरी होता है।