हाल ही में महाराष्ट्र पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट ने एक अहम फैसला लेते हुए सांप के काटने (स्नेक बाइट) को ‘नोटिफाएबल डिजीज’ (Notifiable Disease) घोषित कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब स्वास्थ्य विभाग को सर्पदंश के हर मामले और इससे होने वाली मौतों की आधिकारिक जानकारी देना अनिवार्य होगा। यह कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि भारत में सांप के काटने के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल 30 से 40 लाख स्नेक बाइट के मामले सामने आते हैं, जिनमें 50 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली जाती है। चौंकाने वाली बात यह है कि दुनिया भर में सर्पदंश से होने वाली मौतों में से आधी सिर्फ भारत में होती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जागरूकता की कमी है—आज भी 10 में से केवल 3 पीड़ित ही सही समय पर अस्पताल पहुंच पाते हैं।

विशेषकर मानसून के मौसम में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि बारिश में सांप क्यों बाहर आते हैं, इनके काटने पर तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए।

बारिश के मौसम में क्यों बढ़ जाते हैं सर्पदंश के मामले?

मानसून में सांप के बिलों में बारिश का पानी भर जाता है, जिसके कारण वे सूखी और सुरक्षित जगह की तलाश में बाहर निकल आते हैं। इसके अलावा कई अन्य कारण भी हैं:

  • शिकार की तलाश: बारिश में चूहे, छिपकलियां और मेंढक ज्यादा सक्रिय होते हैं, जिनका पीछा करते हुए सांप इंसानी बस्तियों, घरों या गोदामों तक पहुंच जाते हैं।

  • खेती का काम: इस मौसम में खेतों में काम बढ़ जाता है। घास और झाड़ियां घनी होने के कारण सांप आसानी से छिप जाते हैं और गलती से पैर पड़ने पर डंस लेते हैं।

  • छिपने के ठिकाने: लकड़ी, ईंट या कबाड़ के ढेर, अनाज के गोदाम, दरारें और पुराने जूतों-कपड़ों के ढेर सांपों के लिए सुरक्षित ठिकाने बन जाते हैं।

सांप काट ले तो तुरंत क्या करें? 

स्नेक बाइट के बाद शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं। अगर सही तरीके से फर्स्ट एड दिया जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है:

  1. मरीज को शांत रखें: घबराहट के कारण हार्ट-बीट (दिल की धड़कन) तेज हो जाती है, जिससे शरीर में जहर बहुत तेजी से फैलता है। मरीज को दिलासा दें और स्थिर रखें।

  2. चलने-फिरने न दें: मरीज को तुरंत बैठाएं या सीधा लिटा दें। जिस अंग पर सांप ने काटा है, उसे बिल्कुल न हिलने दें। जरूरत पड़े तो लकड़ी का सपोर्ट बांध दें।

  3. कसी हुई चीजें तुरंत उतारें: अंगूठी, चूड़ी, कड़ा, घड़ी या जूते तुरंत निकाल दें। सूजन बढ़ने पर ये चीजें ब्लड सर्कुलेशन रोक सकती हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है।

  4. बिना देरी किए अस्पताल भागें: सांप के जहर का एकमात्र सटीक इलाज 'एंटी-स्नेक वेनम' (ASV) इंजेक्शन है। मरीज को तुरंत किसी ऐसे बड़े अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर ले जाएं जहां ICU, ऑक्सीजन और ASV की सुविधा उपलब्ध हो।

भूलकर भी न करें ये गलतियां 

डॉ. अजय नायर के अनुसार, फिल्मों या टीवी में दिखाए गए तरीकों को असल जिंदगी में कभी न आजमाएं।

  • घाव को चीरा लगाकर खून निकालने की कोशिश न करें।

  • मुंह से जहर चूसने की गलती बिल्कुल न करें, इससे गंभीर इन्फेक्शन और जान का खतरा बढ़ जाता है।

  • झाड़-फूंक या घरेलू उपायों के चक्कर में इलाज में देरी न करें।

नोट: आम इंसान के लिए सिर्फ देखकर यह पहचानना नामुमकिन है कि सांप जहरीला था या नहीं। इसलिए हर स्नेक बाइट को मेडिकल इमरजेंसी मानकर अस्पताल पहुंचें।

अस्पताल में कैसे होता है इलाज?

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम सबसे पहले मरीज की सांस, हार्ट बीट और ब्लड प्रेशर चेक करती है। जहर के असर का अंदाजा लगाकर तुरंत 'एंटी-स्नेक वेनम' (ASV) इंजेक्शन दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा जाता है और दर्द व सूजन कम करने की दवाइयां दी जाती हैं। मरीज को रिकवरी तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाता है।

सांपों से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स

खासकर ग्रामीण या जंगली इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को मानसून में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए:

  • घर के आसपास की घास, झाड़ियां साफ रखें और जलभराव न होने दें।

  • कबाड़, ईंट या लकड़ियों का ढेर घर के पास न लगाएं।

  • दरवाजों के नीचे गैप स्टॉपर लगाएं और दीवारों/पाइपों की दरारें बंद करें।

  • रात के समय बाहर निकलते वक्त हमेशा टॉर्च और जूतों का इस्तेमाल करें।

  • जमीन पर सोने से बचें और मच्छरदानी का उपयोग करें।

  • पहनने से पहले जूते और कपड़ों को अच्छी तरह झाड़ लें।

याद रखें, सतर्कता और सही समय पर मेडिकल इलाज ही सर्पदंश से बचने का सबसे कारगर हथियार है।