राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पांचना बांध विवाद और सीमावर्ती जिलों में चल रही प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार हालात को संभालने में प्रभावी भूमिका नहीं निभा रही है।
पांचना बांध विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि मामले को लेकर कई दिनों से तनाव बना हुआ है, लेकिन अब तक सरकार ने दोनों पक्षों—गुर्जर और मीणा समाज—के प्रतिनिधियों, पंच-पटेलों और जनप्रतिनिधियों को साथ बैठाकर समाधान निकालने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट भी लगातार निर्देश दे रहा है, जबकि प्रशासनिक अधिकारी अवमानना की आशंका से दबाव में हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष टीम गठित करनी चाहिए, जो संबंधित पक्षों से संवाद स्थापित कर शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता निकाले। उनका मानना है कि समय रहते बातचीत से विवाद का समाधान संभव है।
सीमावर्ती जिलों में चल रही कार्रवाई पर भी गहलोत ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राजस्थान के पाकिस्तान सीमा से जुड़े क्षेत्रों में वर्षों से सामाजिक सौहार्द बना हुआ है और वहां कभी बड़े स्तर पर तनाव की स्थिति नहीं बनी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ धार्मिक स्थलों पर की जा रही कार्रवाई से स्थानीय लोगों में असंतोष पैदा हो रहा है।
गहलोत ने कहा कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी कदम संविधान की भावना और सामाजिक सद्भाव को ध्यान में रखते हुए उठाए जाएं। उन्होंने अधिकारियों से भी निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ काम करने की अपील की।
पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार को किसी भी प्रकार के सामाजिक या जातीय तनाव की संभावना को गंभीरता से लेते हुए संवाद और सहमति के माध्यम से समाधान तलाशना चाहिए, ताकि प्रदेश में शांति और भाईचारा कायम रहे।