जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर धर्म की राजनीति और धार्मिक ध्रुवीकरण के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक लाभ के लिए हिंदुत्व के नाम पर लोगों को भड़काया जा रहा है।
मौलाना अबुल कलाम आजाद वेलफेयर सोसायटी राजस्थान की ओर से आयोजित ‘नवाब दादा कायम खां शहीद दिवस एवं सम्मान समारोह’ में बोलते हुए गहलोत ने कहा कि बीजेपी एक राजनीतिक पार्टी होते हुए भी धर्म के आधार पर राजनीति कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटों में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को सीमित किया जाता है और केवल दिखावे के लिए कुछ सीटें दी जाती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि कई प्रमुख मुस्लिम नेताओं को पार्टी में आगे बढ़ने का अवसर नहीं दिया गया।
गहलोत ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि संविधान सभी धर्मों और जातियों के सम्मान की बात करता है और धर्म के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि एक समय ऐसा था जब धर्म के इस्तेमाल को लेकर चुनावी मामलों में सख्त कार्रवाई होती थी, लेकिन आज स्थिति बदल गई है।
उन्होंने चुनाव आयोग और राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि धर्म के नाम पर लोगों को भड़काया जा रहा है, लेकिन इसका प्रभावी विरोध नहीं हो रहा।
INDIA गठबंधन को लेकर गहलोत ने कहा कि इसे मजबूत करने की आवश्यकता है और इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी कांग्रेस की है। उन्होंने सुझाव दिया कि राहुल गांधी को गठबंधन का नेतृत्व खुले तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिए और “नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी” की सीधी राजनीतिक लड़ाई देश के सामने होनी चाहिए।
वहीं बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने गहलोत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि वे अपनी राजनीतिक छवि सुधारने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की मानसिकता आज भी आपातकाल जैसी है और वे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं।