कोटा में प्रसूत महिलाओं की मौत और कई मरीजों की गंभीर स्थिति को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले की गहन और पारदर्शी जांच कराने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही की सच्चाई सामने आनी चाहिए।
गहलोत ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह घटनाएं 4 मई के आसपास सामने आई थीं, लेकिन डेढ़ महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी मृतक महिलाओं की फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो पाई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जांच रिपोर्ट आने में कई महीनों का समय लगता है, तो सरकार को वैकल्पिक तेज जांच प्रक्रिया पर भी विचार करना चाहिए, ताकि समय पर सच्चाई सामने आ सके।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी चिंता जताई कि वर्तमान में अस्पताल में भर्ती कुछ महिलाओं की किडनी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है और उन्हें लगातार डायलिसिस की जरूरत पड़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और लंबे इलाज के कारण भारी संकट का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि एम्स और राज्य सरकार की संयुक्त टीमों ने मामले की जांच की है, लेकिन उनकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। गहलोत ने कहा कि मरीजों और उनके परिजनों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि आखिर इस स्थिति के पीछे असली कारण क्या हैं। यदि इलाज, दवा या अस्पताल प्रबंधन में कोई कमी सामने आती है तो उसे छिपाया नहीं जाना चाहिए।
गहलोत ने यह भी कहा कि यदि निजी अस्पतालों में समान दवाओं और उपचार के बावजूद ऐसी समस्याएं नहीं आ रही हैं, तो यह गंभीर सवाल उठाता है कि सरकारी अस्पतालों में ही ऐसी स्थिति क्यों बनी। उन्होंने सरकार से इस मामले को विशेष प्रकरण मानकर प्रभावित परिवारों को तुरंत आर्थिक सहायता देने की मांग की।
उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से पीड़ित परिवारों को मदद दी जाए, खासकर उन लोगों को जिन्होंने अपने परिजनों को खो दिया है या जिनकी महिलाएं लंबे समय से गंभीर स्थिति में इलाज करा रही हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर मरीजों को दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाना चाहिए और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह भी ली जानी चाहिए।
इस दौरान पूर्व मंत्री Shanti Dhariwal भी मौजूद रहे। गहलोत ने अंत में कहा कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित राहत बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सके।