राजस्थान की भजनलाल सरकार के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा के अपनी ही सरकार और प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठने के बाद प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है। अलवर नगर निगम में सफाई कर्मचारियों के नियुक्ति पत्रों को लेकर चल रहे विवाद के बीच मंत्री संजय शर्मा खुद निगम परिसर में धरने पर बैठ गए हैं।

इस घटनाक्रम के सामने आते ही विपक्षी दल कांग्रेस पूरी तरह से हमलावर हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार और नौकरशाही पर तीखे जुबानी तीर चलाए हैं।

अलवर नगर निगम में वर्ष 2012 की सफाई कर्मचारी भर्ती के तहत चयनित 69 अभ्यर्थियों को काफी समय से नियुक्ति पत्र नहीं मिल पाए थे। मंत्री संजय शर्मा के अनुसार, उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद स्थानीय निकाय विभाग (DLB) और शासन स्तर पर वार्ता कर 69 पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने का निर्णय लिया गया था।

हालांकि, बुधवार सुबह वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि मंत्री के आवास पर पहुंचे और अधिकारियों द्वारा नियुक्ति पत्र देने से इनकार करने की बात कही। मंत्री संजय शर्मा ने जिला कलेक्टर और नगर निगम अधिकारियों से बात की, लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने पर वे सीधे नगर निगम पहुंचे और वाल्मीकि समाज के लोगों के साथ धरने पर बैठ गए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए जाते, वे धरना स्थल से नहीं उठेंगे।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का तंज: 'जब मंत्री की नहीं सुनी जा रही, तो जनता कहाँ जाएगी?'

मंत्री संजय शर्मा के धरने पर बैठते ही कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक मुद्दा मिल गया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर हमला बोलते हुए इसे राजस्थान का दुर्भाग्य करार दिया।

जूली ने तंज कसते हुए कहा:

टीकाराम जूली ने आगे कहा कि जब मंत्री खुद स्वीकार कर रहे हैं कि उन्होंने नगर निगम आयुक्त, जिला कलेक्टर, डीएलबी मंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई, तो इससे साफ जाहिर होता है कि राजस्थान में शासन कौन चला रहा है।

अमित शाह के दौरे और मुख्यमंत्री से सवाल

टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सवाल किया कि उन्हें इस स्थिति पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगामी अलवर दौरे और क्षेत्र से आने वाले केंद्रीय मंत्रियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को भी अलवर में शासन का यह हाल देखना चाहिए।

अलवर के इस सियासी घटनाक्रम ने राज्य सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण और अंदरूनी खींचतान को एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना दिया है।