राजस्थान से भाजपा सांसद और हरियाणा भाजपा प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया ने मंगलवार को राज्यसभा में अपना पहला संबोधन दिया। उन्होंने अधिकरण सुधार विधेयक-2026 (Tribunal Reforms Bill) पर चर्चा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य आम आदमी को सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उसे समय पर न्याय दिलाना भी है।

डॉ. पूनिया ने कहा कि लोकतंत्र में आम व्यक्ति न्याय की उम्मीद करता है। लेकिन सिर्फ न्याय मिलना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि न्याय समय पर, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से मिलना चाहिए। साथ ही पूरी न्याय व्यवस्था के प्रति जनता का भरोसा कायम रहना जरूरी है।

उन्होंने ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक को देश की अधिकरण व्यवस्था को व्यवस्थित, पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

5.24 लाख लंबित मामलों का किया जिक्र

डॉ. पूनिया ने ट्रिब्यूनल व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि देश में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए कई अधिकरण काम करते रहे हैं।

इनमें टैक्स, कंपनी कानून, पर्यावरण, सशस्त्र बल, दूरसंचार, ऋण वसूली, शेयर बाजार और प्रशासन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनलों में बड़ी संख्या में मामलों के लंबित रहने से न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती रही है। पूनिया ने करीब 5.24 लाख लंबित मामलों का जिक्र करते हुए इसे सरकार के सामने बड़ी चुनौती बताया।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में देश में 37 ट्रिब्यूनल काम कर रहे थे, जो 18 अलग-अलग मंत्रालयों से जुड़े थे। अकेले वित्त मंत्रालय के अधीन 12 ट्रिब्यूनल काम कर रहे थे।

अलग-अलग ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली और क्षमता में अंतर के कारण भी कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आती थीं।

नियुक्तियों में पारदर्शिता पर जोर

पूनिया ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक के जरिए ट्रिब्यूनलों में नियुक्तियों की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन की व्यवस्था को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इससे नियुक्तियों के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था में भी पारदर्शिता बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि अध्यक्ष और सदस्यों के पद लंबे समय तक खाली रहने से मामलों के निस्तारण में देरी होती है। अगर नियुक्तियां समय पर होंगी तो ट्रिब्यूनल अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर सकेंगे और लंबित मामलों के निपटारे की रफ्तार बढ़ेगी।

विशेषज्ञों की भागीदारी को बताया जरूरी

राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान डॉ. पूनिया ने ट्रिब्यूनलों में विशेषज्ञों की भूमिका को भी अहम बताया।

उन्होंने कहा कि तकनीकी, वित्तीय और वाणिज्यिक मामलों में लंबे अनुभव वाले विशेषज्ञों को व्यवस्था में शामिल करने से निर्णय प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी हो सकती है।

उनके मुताबिक, विशेषज्ञता के आधार पर लिए गए फैसले संबंधित क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझते हुए किए जा सकेंगे।

नेशनल ट्रिब्यूनल ग्रिड से मिलेगी पूरी जानकारी

डॉ. पूनिया ने नेशनल ट्रिब्यूनल ग्रिड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था ट्रिब्यूनलों के कामकाज की निगरानी और आंकड़ों के बेहतर प्रबंधन में मददगार साबित हो सकती है।

एक ही प्लेटफॉर्म पर लंबित मामलों, निस्तारित मामलों, खाली पदों और अन्य जरूरी जानकारियां उपलब्ध होने से यह पता लगाने में आसानी होगी कि किस ट्रिब्यूनल को कितने संसाधनों की जरूरत है और कहां सुधार की आवश्यकता है।

पूनिया ने कहा कि ट्रिब्यूनल व्यवस्था में सुधार का सीधा फायदा आम लोगों को मिलना चाहिए। समय पर न्याय, पारदर्शी प्रक्रिया और जवाबदेही से न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा और मजबूत होगा।