भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने देशभर में अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। इस अहम फेरबदल में राजस्थान प्रदेश संगठन में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय से राजस्थान के प्रभारी रहे डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल को हटाकर अब यह जिम्मेदारी संजय भाटिया को सौंप दी गई है। उनके साथ काम करने के लिए कविता पाटीदार और कुलजीत चहल को प्रदेश का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है।
बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा अपनी नई टीम में किए गए इस पहले बड़े बदलाव में राजस्थान के स्थानीय नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं।
सतीश पूनिया और सुनील बंसल को दो-दो राज्यों की कमान
पार्टी ने राजस्थान के प्रमुख नेताओं पर भरोसा जताते हुए उन्हें अहम राज्यों का प्रभार सौंपा है:
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सतीश पूनिया: राजस्थान बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया का कद बढ़ाते हुए उन्हें पंजाब के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर का प्रभारी नियुक्त किया गया है। पंजाब में उनके सहयोग के लिए राज्यसभा सांसद अलका गुर्जर को सह-प्रभारी बनाया गया है।
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सुनील बंसल: उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने का लंबा अनुभव रखने वाले सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना जैसे महत्वपूर्ण राज्यों का प्रभारी बनाया गया है।
कौन हैं राजस्थान के नए सह-प्रभारी?
राजस्थान में संजय भाटिया की टीम में दो अनुभवी चेहरों को शामिल किया गया है:
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कुलजीत चहल: दिल्ली बीजेपी के कद्दावर नेता कुलजीत चहल वर्तमान में न्यू दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NDMC) के उपाध्यक्ष हैं। वे 'नमो एप' के नेशनल कन्वीनर भी रह चुके हैं और उनका लंबा राजनीतिक तजुर्बा अब राजस्थान में पार्टी के काम आएगा।
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कविता पाटीदार: मध्य प्रदेश के मालवा अंचल की कद्दावर ओबीसी नेता कविता पाटीदार वर्तमान में राज्यसभा सांसद और बीजेपी की राष्ट्रीय सचिव हैं। वे प्रदेश महामंत्री और इंदौर जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाली कविता के पिता भेरूलाल पाटीदार मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे थे।
क्यों हुई राधामोहन दास अग्रवाल की विदाई?
जुलाई 2024 में राजस्थान के प्रभारी बनाए गए डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल का कार्यकाल करीब 26 महीने का रहा। राजनीतिक गलियारों में उन्हें हटाए जाने की चर्चाएं काफी समय से चल रही थीं। सूत्रों की मानें तो पिछले कुछ समय से उनका प्रदेश संगठन के साथ तालमेल नहीं बैठ पा रहा था और वे राजस्थान के कामकाज में ज्यादा सक्रिय भी नहीं थे।
अग्रवाल ने कई मौकों पर प्रदेश संगठन की कार्यशैली को लेकर सार्वजनिक रूप से नाराजगी भी जाहिर की थी। हाल ही में जब नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान हुआ, तो उन्हें महामंत्री पद पर जगह नहीं मिली। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि संगठन की जिम्मेदारियों से मुक्त होने के बाद उन्हें जल्द ही मोदी मंत्रिमंडल में कोई अहम पद दिया जा सकता है