जयपुर: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों की तारीखों का इंतज़ार कर रहे लाखों लोगों और स्थानीय नेताओं के लिए हाईकोर्ट से एक बहुत बड़ी और तीखी ख़बर सामने आई है। अदालत ने साफ़ शब्दों में कह दिया है—"अब और कोई बहाना नहीं चलेगा, चुनाव तो हर हाल में करवाने ही पड़ेंगे!" पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में हो रही देरी को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और OBC आरक्षण आयोग की जबरदस्त क्लास लगाई।

अदालत का कड़ा रुख: अब बहानेबाज़ी बंद!

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की बेंच ने सुनवाई के दौरान अफ़सरों को सीधी चेतावनी दी। कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि चुनाव कराने में अब एक दिन की भी देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर आगे कोई लापरवाही हुई, तो सीधे संबंधित बड़े अफ़सरों पर गाज़ गिरेगी और उनकी जवाबदेही तय होगी।

हाईकोर्ट के 4 सबसे बड़े निर्देश:

  • OBC आयोग को अंतिम मोहलत (5 अगस्त): कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक आरक्षण पर OBC आयोग की रिपोर्ट में पहले ही बहुत देर हो चुकी है। अब आयोग को 5 अगस्त 2026 तक हर हालत में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। इसमें 1 दिन का भी अतिरिक्त समय नहीं मिलेगा।

  • 15 अगस्त तक घोषित हो चुनाव कार्यक्रम: राज्य निर्वाचन आयोग से कहा गया है कि आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 8 दिन का समय बहुत है। इसलिए 15 अगस्त 2026 तक चुनाव की तारीखें और पूरा शेड्यूल सामने आ जाना चाहिए।

  • 'रिपोर्ट न आए तब भी नहीं रुकेंगे चुनाव!': इस पूरे फैसले का सबसे बड़ा मोड़ यही है! कोर्ट ने साफ़ कहा कि अगर किसी वजह से 5 अगस्त तक OBC आयोग की रिपोर्ट नहीं भी आ पाती है, तब भी चुनाव नहीं टलेंगे। सरकार 15 अगस्त तक आरक्षण की लॉटरी निकालकर प्रक्रिया आगे बढ़ाए।

  • 15 नवंबर तक पूरी हो चुनाव प्रक्रिया: हाईकोर्ट ने डेडलाइन तय करते हुए आदेश दिया कि 15 नवंबर 2026 तक प्रदेश में चुनाव की पूरी प्रक्रिया संपन्न हो जानी चाहिए।

हाईकोर्ट के इस कड़े हंटर के बाद कोर्ट ने अवमानना याचिका का तो निपटारा कर दिया, लेकिन अफ़सरों और नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सरकार ने भी कोर्ट में 15 नवंबर तक चुनाव संपन्न कराने का भरोसा दे दिया है। लेकिन... क्या OBC आयोग 5 अगस्त की इस टाइट डेडलाइन तक अपनी रिपोर्ट पेश कर पाएगा? और अगर रिपोर्ट नहीं आई, तो बिना रिपोर्ट के निकलने वाली आरक्षण लॉटरी से राजस्थान की स्थानीय राजनीति में क्या नया सियासी भूचाल आएगा? 15 नवंबर की तारीख अब प्रदेश के हर नेता और अफ़सर के लिए अग्निपरीक्षा बन चुकी है!