राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने पूर्व आईएएस अधिकारी संजय दीक्षित और रणजीत सिंह को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज करीब 17 साल पुरानी CBI एफआईआर को रद्द कर दिया है। यह आदेश जस्टिस अनूप ढंढ की अदालत ने दोनों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद जारी किया।
क्या था पूरा मामला?
मामला रणजीत सिंह के पासपोर्ट के लिए किए गए चरित्र सत्यापन (Character Verification) से जुड़ा है। उस समय संजय दीक्षित ने सत्यापन रिपोर्ट दी थी। वर्ष 2009 में प्रहलाद गुर्जर ने पासपोर्ट कार्यालय में शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि रणजीत सिंह को जारी किया गया पासपोर्ट अवैध है और उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई थी CBI FIR
पासपोर्ट कार्यालय द्वारा शिकायत खारिज किए जाने के बाद प्रहलाद गुर्जर ने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया। इसके बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 13 जनवरी 2010 को मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया था। इसी आदेश के आधार पर 29 जनवरी 2010 को CBI ने एफआईआर दर्ज की।
हालांकि, बाद में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 10 नवंबर 2010 को एकलपीठ का आदेश निरस्त करते हुए मामले की दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए थे।
याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?
संजय दीक्षित की ओर से अदालत में कहा गया कि जैसे ही उन्हें रणजीत सिंह के आपराधिक रिकॉर्ड और गिरफ्तारी की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल पुलिस को चरित्र सत्यापन वापस लेने की सूचना दे दी थी।
वहीं रणजीत सिंह की ओर से अदालत को बताया गया कि जिस याचिका के आधार पर CBI जांच शुरू हुई थी, वह बाद में बिना किसी अंतिम आदेश के समाप्त हो चुकी थी। ऐसे में उस आधार पर दर्ज एफआईआर को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं था।
CBI ने किया विरोध
CBI की ओर से अदालत में दलील दी गई कि संजय दीक्षित ने एक हिस्ट्रीशीटर व्यक्ति का चरित्र सत्यापन किया था और जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री भी सामने आई थी। हालांकि, अदालत ने मामले के तथ्यों और कानूनी पक्षों पर विचार करने के बाद दोनों याचिकाओं को स्वीकार करते हुए एफआईआर रद्द कर दी।