राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन ऑपरेशन के बाद महिलाओं की किडनी फेल होने के मामले में बुधवार को नया मोड़ सामने आया। अस्पताल के नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती पांच पीड़ित महिलाओं में से चार मीडिया के सामने आईं और भावुक होते हुए सरकार से किडनी ट्रांसप्लांट कराने की मांग की। महिलाओं ने कहा कि यदि सरकार उनकी मदद नहीं कर सकती तो उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए।
दो महीने से अस्पताल में भर्ती
पीड़ित महिलाओं ने बताया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती हुए 70 दिनों से अधिक का समय हो चुका है। हर दो-तीन दिन में डायलिसिस की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जो बेहद दर्दनाक है। उनका कहना है कि लगातार इलाज के बावजूद उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है।
48 घंटे का अल्टीमेटम पूरा, डायलिसिस से किया इनकार
दो दिन पहले पीड़ित महिलाओं के परिजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की थी और प्रशासन को 48 घंटे का समय दिया था। निर्धारित समय पूरा होने के बाद महिलाओं ने विरोध स्वरूप बुधवार से डायलिसिस कराने से इनकार कर दिया।
बुधवार को पिंकी और आरती का डायलिसिस होना था, लेकिन दोनों ने प्रक्रिया कराने से मना कर दिया।
'हम डिलीवरी के लिए आए थे, अब जिंदगी अस्पताल में गुजर रही है'
पीड़ित महिला रागिनी ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि वह 4 मई को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती हुई थीं। सीजेरियन ऑपरेशन के बाद उनकी किडनी ने काम करना बंद कर दिया। अब हर कुछ दिनों में डायलिसिस कराना पड़ता है, जिससे असहनीय दर्द, बुखार और कमजोरी होती है।
उन्होंने कहा कि परिवार पूरी तरह टूट चुका है। इलाज के कारण पति की नौकरी तक छूट गई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उन्हें स्वस्थ करके घर भेजा जाए या फिर इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए।
दूसरी पीड़ित धन्नी बाई ने भी कहा कि अब वह डायलिसिस नहीं करवाएंगी, चाहे इसके परिणाम कुछ भी हों।
डायलिसिस नहीं होने से एक महिला की हालत बिगड़ी
डायलिसिस का बहिष्कार करने के बाद बुधवार को आरती की तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर अस्पताल प्रशासन ने उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया। इसके बावजूद अन्य महिलाएं अपनी मांग पर कायम हैं और लिखित रूप से किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था की मांग कर रही हैं।
क्या है पूरा मामला?
4 से 8 मई के बीच कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती हुई पांच महिलाओं की सीजेरियन ऑपरेशन के बाद किडनी फेल हो गई थी। इसके बाद से सभी महिलाओं का सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक (SSB) में इलाज चल रहा है और उन्हें नियमित डायलिसिस दिया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने क्या कहा?
कोटा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने कहा कि पांचों महिलाओं की स्थिति फिलहाल स्थिर है और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार उनका डायलिसिस किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जब तक किडनियां स्वयं रिकवर नहीं हो जातीं, तब तक डायलिसिस जरूरी है। फिलहाल यह कहना संभव नहीं है कि यह प्रक्रिया कितने समय तक चलेगी। वहीं, किडनी ट्रांसप्लांट पर मरीजों की स्थिति का मूल्यांकन 3 से 6 महीने बाद ही किया जा सकेगा।