राजस्थान में सक्रिय रोहित गोदारा गैंग की एक बड़ी साजिश को सीकर पुलिस और एजीटीएफ (AGTF) ने नाकाम कर दिया है। पुलिस ने गैंग से जुड़े दो गुर्गों गुलाब सिंह और प्रदीप मंडीवाल को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से जिगाना जैसी हाईटेक पिस्टल और 63 कारतूस बरामद किए हैं। पूछताछ में सामने आया है कि गैंग राजस्थान में किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार बरामद हथियारों का इस्तेमाल गैंग के शूटरों द्वारा किया जाना था। हालांकि गैंग के सदस्यों के बीच कम्युनिकेशन में आई बाधा के कारण योजना समय पर पूरी नहीं हो सकी और इसी दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हथियार बरामद कर लिए।
जांच में यह भी सामने आया है कि पहले गैंग के सदस्य आपसी संपर्क के लिए सिग्नल एप का इस्तेमाल करते थे, लेकिन बाद में गैंग के प्रमुख सहयोगियों के कहने पर इसका उपयोग बंद कर दिया गया। इसके बाद वे दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क में रहने लगे। हाल के दिनों में उस प्लेटफॉर्म पर बढ़ी निगरानी और तकनीकी दिक्कतों के कारण गैंग के गुर्गों के बीच संपर्क प्रभावित हुआ, जिससे उनकी योजना में देरी हुई।
सूत्रों के मुताबिक राजस्थान के अन्य इलाकों में भी गैंग के हथियार पहुंचने की आशंका है। इस संबंध में पुलिस और खुफिया एजेंसियां जांच कर रही हैं।
राहुल रिणाऊ और वीरेंद्र चारण पर फोकस
जांच में यह भी सामने आया है कि राजस्थान में गैंग की गतिविधियों के संचालन में राहुल रिणाऊ और वीरेंद्र चारण की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार संभावित लक्ष्यों की जानकारी जुटाने, उनकी गतिविधियों पर नजर रखने और स्थानीय स्तर पर नेटवर्क तैयार करने जैसे कार्यों में इनकी भूमिका सामने आई है।
बताया जा रहा है कि स्थानीय युवाओं को पैसों का लालच देकर सूचनाएं जुटाने और रैकी जैसे कार्यों में शामिल करने की कोशिश की जाती थी। पुलिस इन पहलुओं की भी जांच कर रही है।
फिरौती मामले में भी सामने आया नाम
जनवरी में सीकर के एक ज्वेलर को करोड़ों रुपए की फिरौती के लिए धमकी देने के मामले में पुलिस ने एक नाबालिग और राहुल रिणाऊ के रिश्तेदार शिव गौतम को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान सामने आया कि ज्वेलर की गतिविधियों की जानकारी जुटाने के लिए स्थानीय स्तर पर लोगों का इस्तेमाल किया गया था।
युवाओं को गैंग से जोड़ने की कोशिश
पुलिस सूत्रों का कहना है कि गैंग बेरोजगार और कम उम्र के युवाओं को पैसों का लालच देकर अपने नेटवर्क से जोड़ने का प्रयास कर रही थी। हालांकि पुलिस की डिजिटल और साइबर टीमें ऐसे संदिग्ध संपर्कों और गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
पुलिस का मानना है कि गैंग का उद्देश्य धमकियों और हिंसक घटनाओं के जरिए भय का माहौल बनाना था। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस गैंग के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।