जोधपुर: आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर से बदले की एक ऐसी साजिश सामने आई है, जिसे जानकर पुलिस भी हैरान रह गई। आरोप है कि कैंटीन का ठेका हाथ से निकलने और ड्राइवर की नौकरी जाने से नाराज एक पूर्व ठेकेदार ने वर्तमान कैंटीन संचालक को झूठे एनडीपीएस केस में फंसाने की योजना बनाई।
उसने कथित तौर पर कैंटीन परिसर के एक कमरे में डोडा पोस्त छिपाया और फिर पुलिस को सूचना दिलवाई, ताकि छापेमारी के दौरान वर्तमान संचालक के खिलाफ कार्रवाई हो सके। हालांकि एएनटीएफ और करवड़ थाना पुलिस की सतर्कता के कारण साजिश का खुलासा हो गया और एक बेगुनाह जेल जाने से बच गया।
पूर्व ठेकेदार के कब्जे में था कमरा
करवड़ थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर स्थित हरिओम फास्ट फूड कैंटीन के एक कमरे में अवैध डोडा पोस्त रखा हुआ है। सूचना के बाद एएनटीएफ की टीम करवड़ थाना पुलिस के साथ मौके पर पहुंची।
पुलिस ने कैंटीन के वर्तमान संचालक से पूछताछ की तो उसने बताया कि कैंटीन परिसर का एक कमरा अभी भी पूर्व ठेकेदार प्रदीप कुमार के कब्जे में है और कमरे की चाबी भी उसी के पास है।
इसके बाद पुलिस ने पूर्व ठेकेदार प्रदीप कुमार को मौके पर बुलाया और मामले की जांच शुरू की।
ताला तोड़ा तो मिला डोडा पोस्त
पुलिस ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव से भी कमरे की स्थिति को लेकर जानकारी ली। इसके बाद प्रदीप कुमार से कमरे की चाबी मांगी गई, लेकिन उसने चाबी होने से इनकार कर दिया।
पुलिस ने गवाहों की मौजूदगी में कमरे का ताला तुड़वाया। कमरे की तलाशी के दौरान कांच की बोतलों के नीचे छिपाकर रखा गया करीब 125 ग्राम अवैध डोडा पोस्त बरामद हुआ।
पुलिस ने आरोपी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर लिया। मामले की आगे की जांच मथानिया थाना पुलिस अधिकारी तुलसी चौधरी को सौंपी गई है।
नौकरी और कैंटीन का ठेका दोनों गए
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर साजिश के पीछे की वजह बताई। प्रदीप कुमार पहले इसी कैंटीन का संचालन करता था। इसके साथ ही वह विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार कार्यालय में ड्राइवर के तौर पर काम करता था।
हाल ही में उसे ड्राइवर की नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। इसी दौरान कैंटीन का नया ठेका भी दूसरी एजेंसी को मिल गया।
आरोप है कि नौकरी और कैंटीन का ठेका दोनों हाथ से निकलने के बाद वह नाराज था और उसने वर्तमान कैंटीन संचालक से बदला लेने की योजना बनाई।
पुलिस रेड करवाकर जेल भेजने की थी तैयारी
पूछताछ में सामने आया कि कथित तौर पर वर्तमान कैंटीन संचालक को एनडीपीएस एक्ट के झूठे मामले में फंसाने की तैयारी की गई थी।
आरोप है कि पूर्व ठेकेदार ने कमरे में खुद डोडा पोस्त रखवाया और इसके बाद अपने एक परिचित के जरिए पुलिस तक शिकायत पहुंचाई। मकसद यह था कि पुलिस कैंटीन परिसर में छापेमारी करे और डोडा पोस्त मिलने के बाद वर्तमान संचालक के खिलाफ कार्रवाई हो जाए।
लेकिन पुलिस और एएनटीएफ की जांच में कमरे पर पूर्व ठेकेदार का कब्जा होने की बात सामने आ गई। इसके बाद जब ताला तोड़कर तलाशी ली गई तो डोडा पोस्त बरामद हुआ और पूरी कहानी पलट गई।
फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि इस साजिश में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल थे।