दौसा |  सरकार जरूरतमंद परिवारों तक मुफ्त राशन पहुंचाने के लिए हर महीने करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, ताकि कोई भी गरीब भूखा न सोए। लेकिन राजस्थान के दौसा जिले से सामने आया एक बड़ा राशन घोटाला इस पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। यहां सात राशन डीलरों पर गरीबों के हिस्से का 3011 क्विंटल गेहूं गबन करने का आरोप साबित हुआ है। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद सभी सातों राशन डीलरों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। दो मामलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, जबकि पांच अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए गए हैं।

शिकायतों से खुला घोटाले का राज

मामले का खुलासा तब हुआ जब दौसा जिले के कई गांवों के राशन कार्डधारकों ने लगातार शिकायतें भेजीं कि उन्हें महीनों से सरकारी गेहूं नहीं मिल रहा है। लाभार्थियों का आरोप था कि राशन डीलर हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर उन्हें खाली हाथ लौटा देते थे। किसी से कहा जाता कि "सरकारी गेहूं अभी आया नहीं है", तो किसी को "स्टॉक खत्म हो गया है, अगले महीने आना" कहकर वापस भेज दिया जाता था।

लेकिन जब रसद विभाग ने रिकॉर्ड की जांच की तो चौंकाने वाला सच सामने आया। जिन लाभार्थियों को राशन नहीं मिला था, उनके नाम पर रिकॉर्ड में पूरा वितरण दिखाया गया था। इससे साफ हुआ कि गरीबों के हिस्से का गेहूं कहीं और खपाया जा रहा था।

रिकॉर्ड और स्टॉक में मिला बड़ा अंतर

ग्रामीणों की शिकायतों के बाद रसद विभाग ने संबंधित राशन दुकानों के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड और वास्तविक भंडारण का मिलान किया। जांच में कई जगह भारी अनियमितताएं सामने आईं। रिकॉर्ड में वितरण दिखाया गया, लेकिन वास्तविक स्टॉक और लाभार्थियों के बयान इससे मेल नहीं खाते थे। विस्तृत जांच के बाद सातों राशन डीलरों को दोषी माना गया।

सबसे बड़ा मामला पलानहेड़ा का

जांच के अनुसार सबसे बड़ा घोटाला पलानहेड़ा क्षेत्र में सामने आया, जहां राशन डीलर पर 840 क्विंटल गेहूं के गबन का आरोप है। यह जिले का सबसे बड़ा मामला माना जा रहा है। विभाग ने इस मामले में भी पुलिस कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं।

किन-किन डीलरों पर हुई कार्रवाई?

लालाराम मीणा (भांवता-भांवती) – 408 क्विंटल गेहूं के गबन का आरोप, एफआईआर दर्ज।

रमेश चंद्र शर्मा (जीतपुर राहुवास) – 256 क्विंटल गेहूं के गबन का आरोप, एफआईआर दर्ज कराने के आदेश।

साहब सिंह गुर्जर (नाहिड़ा) – 254 क्विंटल 74 किलो गेहूं के गबन का आरोप, एफआईआर के आदेश।

आराम सिंह गुर्जर (बड़ागांव) – 196 क्विंटल गेहूं के गबन का आरोप, एफआईआर दर्ज कराने के आदेश।

जतन सिंह गुर्जर (सलमेपुर) – 526 क्विंटल गेहूं के गबन का आरोप, एफआईआर के आदेश।

तोताराम मीणा (ठीकरिया) – 531 क्विंटल गेहूं के गबन का आरोप, एफआईआर दर्ज।

संजय कुमार मीणा (पलानहेड़ा) – 840 क्विंटल गेहूं के गबन का आरोप, एफआईआर के आदेश।

विभाग का सख्त रुख

रसद विभाग ने स्पष्ट किया है कि विभागीय जांच में सातों राशन डीलर दोषी पाए गए हैं। सभी के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। दो मामलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, जबकि पांच अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए गए हैं। विभाग का कहना है कि गरीबों के हक का राशन हड़पने वालों के खिलाफ नियमों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

गरीबों के भरोसे पर चोट

यह मामला सिर्फ अनाज के गबन का नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों के अधिकारों से खिलवाड़ का है, जो हर महीने सरकारी राशन पर निर्भर रहते हैं। यदि जांच में सामने आए आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं, तो यह राजस्थान के हाल के वर्षों के बड़े राशन घोटालों में से एक माना जाएगा। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।