टोंक। जिले में एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत के बाद यातायात पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी जान चली गई। परिजनों का कहना है कि सीने में दर्द की शिकायत के बाद शिवजी लाल यादव को बाइक से अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में यातायात पुलिस ने बाइक रोक ली।

परिजनों के अनुसार बाइक पर तीन लोग सवार थे और हेलमेट भी नहीं था। इसी वजह से पुलिसकर्मियों ने बाइक को रोककर कार्रवाई शुरू की। आरोप है कि पुलिस ने बाइक की चाबी अपने पास रख ली और करीब एक घंटे तक उन्हें जाने नहीं दिया। परिजनों का दावा है कि बुजुर्ग की हालत लगातार बिगड़ रही थी और अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के कारण उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि गंभीर मरीज को देखते हुए तत्काल अस्पताल पहुंचाने की अनुमति मिलनी चाहिए थी।

वहीं, संबंधित यातायात पुलिसकर्मी ने परिजनों के आरोपों को गलत बताया है। पुलिस की ओर से कहा गया है कि नियमों के तहत कार्रवाई की गई थी और ऐसा कोई घटनाक्रम नहीं हुआ जिससे इलाज में देरी हुई हो।

मामले को लेकर सआदत अस्पताल की डॉक्टर दिशा साहनी ने बताया कि बुजुर्ग को अस्पताल में गंभीर हालत में लाया गया था। डॉक्टरों ने इलाज की कोशिश की, लेकिन उनकी हालत बेहद नाजुक थी।

विवाद बढ़ने के बाद टोंक पुलिस अधीक्षक ने मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बुजुर्ग की मौत के पीछे इलाज में देरी की वजह थी या उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति। पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं, प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान की जांच करेगी।