प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनावों की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पंचायती राज विभाग ने एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर्स और उपखंड अधिकारियों (SDM/SDO) को अपने-अपने क्षेत्रों में वार्डों की आरक्षण लॉटरी निकालने की जिम्मेदारी सौंप दी है। सितंबर से नवंबर के बीच प्रस्तावित इन चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग ने समय पर निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए जमीनी स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
41 जिला परिषद और 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में बजने वाला है बिगुल
पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार प्रदेश के विशाल ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर चुनावी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
चुनावों का पूरा खाका:
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जिला परिषद: 41
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पंचायत समितियां: 457
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ग्राम पंचायतें: 14,403
इन सभी निकायों में जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, प्रधान, सरपंच, उपसरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव नवंबर तक पूरे करवाने का लक्ष्य रखा गया है।
5 अगस्त को आएगी OBC आयोग की रिपोर्ट, फिर तय होगी लॉटरी
पंचायती राज चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट काफी अहम मानी जा रही है। आयोग द्वारा 5 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट आने के तुरंत बाद सरकार के स्तर पर सरपंच, उपसरपंच, प्रधान और वार्डों के आरक्षण की लॉटरी की प्रक्रिया शुरू होगी।
जानिए कैसे और कहां निकाली जाएगी आरक्षण की लॉटरी?
विभाग द्वारा तय की गई व्यवस्था के अनुसार आरक्षण की लॉटरी दो अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों पर निकाली जाएगी:
1. जिला मुख्यालय स्तर (कलेक्टर की निगरानी में):
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जिला परिषद वार्डों का आरक्षण।
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पंचायत समितियों के प्रधान पदों का आरक्षण।
2. उपखंड स्तर (SDO / SDM की देखरेख में):
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पंचायत समिति सदस्यों के वार्ड।
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ग्राम पंचायतों के वार्ड।
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सरपंच और उपसरपंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी।
जन-प्रतिनिधियों और दावेदारों में हलचल तेज
विभाग द्वारा अधिसूचना जारी होते ही ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक सरगर्मियां और चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं। संभावित प्रत्याशी अब 5 अगस्त को आने वाली OBC आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद निकलने वाली आरक्षण लॉटरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, ताकि वे अपनी-अपनी दावेदारी पक्की कर सकें।