राजधानी जयपुर के आमेर क्षेत्र में सोमवार सुबह उस वक्त भारी हड़कंप मच गया, जब सीआईएसएफ (CISF) कैंपस के पास स्थित खातीवालों की ढाणी (वार्ड नंबर 148) में एक जिंदा बम मिला। आबादी क्षेत्र और सुरक्षा बलों के कैंपस के नजदीक विस्फोटक मिलने की सूचना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। हालांकि, पुलिस, सिविल डिफेंस और बम निरोधक दस्ते (BDDS) की त्वरित कार्रवाई से समय रहते एक बड़ा खतरा टल गया।

खेत में काम करते समय महिला को दिखा विस्फोटक

आमेर थानाधिकारी गौतम डोटासरा के अनुसार, सुबह करीब 10:30 बजे गांव की एक स्थानीय महिला खेत से गुजर रही थी। कचरे के ढेर के पास उसे एक संदिग्ध बमनुमा वस्तु नजर आई। महिला ने तुरंत इसकी जानकारी अपने परिजनों और ग्रामीणों को दी। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और ग्रामीणों ने बिना देरी किए पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी।

8 मिनट में मौके पर पहुंची टीमें, इलाके को कराया खाली

सिविल डिफेंस के डिप्टी कंट्रोलर अमित शर्मा ने बताया कि पुलिस कंट्रोल रूम से सुबह लगभग 11:05 बजे अलर्ट मिला। सूचना मिलते ही महज 8 मिनट के भीतर पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंच गई।

  • सुरक्षा के मद्देनजर सबसे पहले आसपास जमा भीड़ को हटाया गया और पूरे इलाके की घेराबंदी की गई।

  • संदिग्ध वस्तु की प्रारंभिक जांच में उसके जिंदा बम होने की पुष्टि होते ही तुरंत बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) को तलब किया गया।

गहरा गड्ढा खोदकर किया सुरक्षित डिस्पोज, हुआ जोरदार धमाका

बम निरोधक दस्ते ने अत्यधिक सावधानी बरतते हुए बम को अपने कब्जे में लिया। आबादी क्षेत्र से दूर एक सूनसान इलाके में ले जाकर जमीन में गहरा गड्ढा खोदा गया। दोपहर करीब 2:00 बजे बम को सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज (नष्ट) किया गया। डिस्पोजल के दौरान जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी।

इस रेस्क्यू और डिफ्यूजल ऑपरेशन में डिप्टी कंट्रोलर अमित शर्मा के नेतृत्व में सीडीई असरार अहमद, राजेश कुमार, युनूस खान, मोहम्मद बिलाल, दीपक सैनी और घनश्याम शर्मा की सक्रिय भूमिका रही।

मुकदमा दर्ज, जांच में जुटी पुलिस

सीआईएसएफ कैंपस जैसे संवेदनशील इलाके के पास जिंदा बम मिलने के मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। आमेर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि यह विस्फोटक वहां कैसे पहुंचा, इसके पीछे किन असामाजिक तत्वों का हाथ है और क्या यह किसी पुरानी सैन्य/सुरक्षा गतिविधि से जुड़ा हुआ शैल है।