राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना बीसलपुर बांध पर इस बार मानसून की धीमी रफ्तार का असर साफ दिखाई देने लगा है। जुलाई के पहले सप्ताह में हुई बारिश के बाद जलग्रहण क्षेत्र में वर्षा लगभग थम गई है, जिससे बांध में पानी की आवक भी रुक गई है। लगातार पेयजल निकासी और बढ़ते वाष्पीकरण के कारण अब बांध का जलस्तर गिरने लगा है।

बुधवार सुबह बीसलपुर बांध का जलस्तर 313.68 आरएल मीटर दर्ज किया गया। पिछले पांच दिनों में जलस्तर करीब 2 सेंटीमीटर कम हुआ है, जिससे जल संसाधन विभाग की चिंता बढ़ गई है।

पहले बढ़ा जलस्तर, फिर थम गई आवक

3 जुलाई को मानसून सक्रिय होने के बाद बांध में 25.320 टीएमसी पानी था। 10 जुलाई तक यह बढ़कर 26.286 टीएमसी पहुंचा। यानी पूरे सप्ताह में केवल 0.966 टीएमसी पानी की बढ़ोतरी हुई।

इसके बाद जलग्रहण क्षेत्र में बारिश कमजोर पड़ गई और बांध में नई आवक लगभग बंद हो गई। नतीजतन जलस्तर दोबारा घटने लगा।

पिछले साल से काफी पीछे जलभंडार

इस वर्ष बीसलपुर बांध का जलभंडार पिछले साल की तुलना में काफी कम है।

  • 14 जुलाई 2025: जलस्तर 314.07 आरएल मीटर, जलभंडार 28.771 टीएमसी
  • 10 जुलाई 2026: जलभंडार 26.286 टीएमसी

यानी पिछले वर्ष की तुलना में इस बार करीब 2.49 टीएमसी पानी कम दर्ज किया गया है। अब जलस्तर और नीचे आने से यह अंतर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

इन शहरों की प्यास बुझाता है बीसलपुर बांध

बीसलपुर बांध से प्रतिदिन जयपुर, अजमेर, टोंक, ब्यावर सहित राजस्थान के कई शहरों को पेयजल उपलब्ध कराया जाता है।

उधर, मौसम में बढ़ी उमस के कारण वाष्पीकरण भी तेज हो गया है। ऐसे में जितना पानी बांध से निकाला जा रहा है, उतनी मात्रा में नई आवक नहीं हो रही, जिससे जलस्तर पर लगातार दबाव बना हुआ है।

जुलाई का दूसरा पखवाड़ा रहेगा अहम

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जुलाई का दूसरा पखवाड़ा बीसलपुर बांध के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।

यदि त्रिवेणी नदी और पूरे जलग्रहण क्षेत्र में लगातार अच्छी बारिश होती है तो जलस्तर में तेजी से सुधार हो सकता है। लेकिन यदि मानसून कमजोर रहा, तो प्रदेश की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना अपेक्षित स्तर तक नहीं भर पाएगी।

बीसलपुर बांध: एक नजर में

  • शिलान्यास : 1985
  • निर्माण कार्य शुरू : 1987
  • निर्माण पूरा : 1996
  • निर्माण लागत : 832 करोड़ रुपये
  • अधिकतम जलभराव क्षमता : 315.50 आरएल मीटर

कब-कब छलका बीसलपुर बांध

  • 2004 – पहली बार गेट खुले
  • 2006 – दूसरी बार ओवरफ्लो
  • 2014 – तीसरी बार गेट खुले
  • 2016 – चौथी बार छलका
  • 2019 – 17 गेट खोले गए
  • 2022 – फिर ओवरफ्लो
  • 2024 – सातवीं बार छलका
  • 2025 – आठवीं बार बांध पूरी क्षमता तक भरा