राजस्थान में इस सप्ताह तीन ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने अलग-अलग वजहों से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कहीं छात्र राजनीति का तरीका बदलता दिखाई दिया, कहीं शिक्षा व्यवस्था पर दिए गए बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया, तो कहीं अंधविश्वास और कथित टोटके के नाम पर ब्यूटी पार्लर में हुआ घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया।

1. राजस्थान यूनिवर्सिटी में विरोध का नया तरीका

राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्र नेता शुभम रेवाड़ लगातार अनोखे और रचनात्मक तरीके अपनाते नजर आ रहे हैं। पारंपरिक धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी की जगह वे कला और नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से छात्रों के मुद्दे उठा रहे हैं।

इस बार उन्होंने छात्रों पर बैक परीक्षा और पुनर्मूल्यांकन शुल्क के बढ़ते आर्थिक बोझ को मुद्दा बनाया। नाटक के जरिए उन्होंने नए विद्यार्थियों को बताया कि फीस के नाम पर अतिरिक्त वसूली को वे "वीसी टैक्स" मानते हैं। इससे पहले भी वे विश्वविद्यालय में पेयजल की जांच, अधिकारियों को कुल्हड़ में चाय पहुंचाने और छात्रों के लिए सुविधाओं की मांग को अलग अंदाज में उठाकर चर्चा में रह चुके हैं।

2. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बयान पर मचा विवाद

टोंक में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सरकारी शिक्षकों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जो सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाते हैं, वे "निकम्मे" हैं और उन्हें पढ़ाना नहीं आता।

मंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे शिक्षकों की आदतों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बयान सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस शुरू हो गई। बाद में यह भी चर्चा में आया कि मंत्री के परिवार के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं, जिसके बाद विपक्ष ने उनके बयान पर सवाल उठाए।

3. चूरू के ब्यूटी पार्लर में 'टोटका' और हंगामा

चूरू जिले के सादुलपुर में स्थित एक ब्यूटी पार्लर में कथित टोटके का मामला सामने आया। पार्लर में काम करने वाली युवतियों ने आरोप लगाया कि मालिक उनके पीने के पानी में संदिग्ध पदार्थ मिला रहा था। कर्मचारियों को पहले से शक था, इसलिए उन्होंने मोबाइल कैमरा लगाकर पूरी घटना रिकॉर्ड कर ली।

वीडियो सामने आने के बाद कर्मचारियों ने मालिक का विरोध किया और मौके पर जमकर हंगामा हुआ। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कर्मचारियों के आरोपों की सत्यता की पड़ताल की जा रही है।

राजस्थान की ये तीनों घटनाएं अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी हैं, लेकिन एक समान बात यह है कि इन्होंने आम लोगों के बीच व्यापक चर्चा पैदा की। छात्र राजनीति में विरोध के बदलते तरीके, शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल और अंधविश्वास से जुड़े मामलों ने एक बार फिर सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों को केंद्र में ला दिया।