नागौर। राजस्थान के नागौर जिले में छुट्टियों पर घर आए भारतीय सेना के एक जवान की अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना से पूरे परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार को जवान का पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटकर गांव लाया गया, जहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे को तिरंगे में लिपटा देख मां बेसुध हो गई, जबकि पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था।
मृतक जवान भगवाना राम (40) नागौर जिले के अलाय गांव के रहने वाले थे और वर्तमान में मणिपुर के नॉर्थ इंफाल में तैनात थे। वे 9 जुलाई को छुट्टियां बिताने अपने घर आए थे। शनिवार शाम अचानक उन्हें घर पर चक्कर आए और वे बेहोश होकर गिर पड़े। परिजन उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है।
परिजनों ने सेना के अधिकारियों को घटना की सूचना दी। रविवार सुबह सेना के साथी जवान नागौर पहुंचे और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। सबसे पहले पार्थिव शरीर को नागौर की संजय कॉलोनी स्थित घर लाया गया, जहां लोगों ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव अलाय ले जाया गया।
गांव में सुबह करीब 10 बजे तिरंगा यात्रा शुरू हुई, जो दोपहर करीब एक बजे श्मशान घाट पहुंची। यात्रा में सैकड़ों ग्रामीण, रिश्तेदार और सेना के जवान शामिल हुए। पूरे रास्ते भारत माता की जय, वंदे मातरम् और देशभक्ति के नारों से गांव की गलियां गूंज उठीं। हर आंख नम थी और लोग भगवाना राम के देशप्रेम और सेवाभाव को याद कर भावुक हो गए।
सबसे मार्मिक दृश्य उस समय देखने को मिला जब तिरंगे में लिपटे बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर उनकी मां फूट-फूटकर रोने लगीं और बेसुध हो गईं। पत्नी परमा देवी और उनके बच्चे भी पार्थिव शरीर से लिपटकर बिलख पड़े। परिवार का कहना है कि भगवाना राम पूरी तरह स्वस्थ थे और उन्हें किसी भी तरह की बीमारी नहीं थी। ऐसे में उनकी अचानक मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया।
भगवाना राम 7 अगस्त को वापस ड्यूटी पर लौटने वाले थे। उन्होंने महज 20 साल की उम्र में 8 जुलाई 2006 को भारतीय सेना जॉइन की थी। वे महार रेजिमेंट में सेवाएं दे रहे थे और अपने 20 साल के सैन्य करियर में गलवान, भुज, उधमपुर समेत देश के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर तैनात रह चुके थे। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग नॉर्थ इंफाल (मणिपुर) में थी।
भगवाना राम अपने पीछे माता-पिता, पत्नी परमा देवी, बेटा नीलेश (5 वर्ष) और बेटियां खुशबू (15 वर्ष) तथा सोनाक्षी (11 वर्ष) को छोड़ गए हैं। उनकी असमय मौत से परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में गहरा शोक है। जवान को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई और हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम सलाम किया।