राजस्थान की राजधानी जयपुर के सबसे व्यस्त और मशहूर 'अजमेरी गेट' पर बुधवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब 12वीं क्लास का एक छात्र गेट के ऊपर चढ़ गया और नीचे कूदने की धमकी देने लगा। बीच बाजार में इस हाई-वोल्टेज ड्रामे को देखकर लोगों की सांसें अटक गईं। सूचना मिलते ही जालूपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सूझबूझ से काम लेते हुए छात्र को सकुशल नीचे उतार लिया।
आखिर यह छात्र गेट पर क्यों चढ़ा और पुलिस ने उसे कैसे बचाया? आइए जानते हैं पूरा मामला।
मां की समझाइश रही बेअसर, फोन भी नीचे फेंका
चित्रकूट इलाके का रहने वाला यह 16 वर्षीय छात्र सुबह-सुबह अचानक अजमेरी गेट पर चढ़ गया। पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद जब थानाधिकारी ने उससे बात करने की कोशिश की, तो गुस्से में आकर छात्र ने अपना मोबाइल नीचे फेंक दिया। पुलिस ने उसी मोबाइल से उसकी मां को कॉल कर तुरंत मौके पर बुलाया। मां ने अपने बेटे को नीचे उतरने के लिए बहुत समझाया, रोईं-गिड़गिड़ाईं, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ा रहा और नीचे उतरने से साफ मना कर दिया।
कॉन्स्टेबल ने पीछे से चढ़कर यूं बचाई जान
जब छात्र बातों से नहीं माना, तो पुलिस ने तुरंत सिविल डिफेंस की टीम को मौके पर बुला लिया। टीम ने एहतियात के तौर पर नीचे जाल बिछा दिया ताकि अगर बच्चा कूदे तो उसकी जान बचाई जा सके। बच्चे का मुंह एमआई रोड (MI Road) की तरफ था।
इसी दौरान जालूपुरा थाने के कॉन्स्टेबल अविनाश ने गजब की फुर्ती और बहादुरी दिखाई। वे चुपके से गेट के दूसरी तरफ (पीछे की ओर) से ऊपर चढ़े और बातों में उलझे हुए छात्र को पीछे से पकड़कर सुरक्षित नीचे उतार लिया। हैरानी की बात यह रही कि छात्र अपने साथ 'मिर्ची का स्प्रे' (Pepper Spray) भी लेकर ऊपर चढ़ा था।
क्या है इस पूरे ड्रामे की असल वजह?
एसीपी कोतवाली ओमप्रकाश ने बताया कि पूछताछ में छात्र ने स्कूल से परेशान होने की बात कबूली है। छात्र पहले चित्रकूट स्थित एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ता था। उसे गौ रक्षा से बहुत लगाव है और वह स्कूल में 'गौ रक्षा' से जुड़ी बातों का प्रचार-प्रसार करता था।
स्कूल प्रशासन को उसका यह तरीका पसंद नहीं आया और उन्होंने उसकी टीसी (Transfer Certificate) काट दी। इसके बाद छात्र ने दूसरे स्कूल में एडमिशन ले लिया था, लेकिन वह अपने पुराने स्कूल के रवैये से बेहद खफा और तनाव में था। इसी ताव में आकर उसने यह खौफनाक कदम उठाया।
फिलहाल पुलिस ने बाल कल्याण अधिकारी की मौजूदगी में बच्चे की काउंसलिंग की है और समझाइश के बाद उसे उसके परिजनों को सौंप दिया गया है।