राजस्थान सरकार ने फायर एनओसी (No Objection Certificate) और फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी के कारण सील की गई बिल्डिंगों को बड़ी राहत दी है। स्वायत्त शासन विभाग (DLB) ने आदेश जारी कर ऐसे भवनों को निर्धारित शर्तों के साथ डी-सील करने की अनुमति दे दी है।
दरअसल, दिल्ली और अन्य स्थानों पर हुई आगजनी की घटनाओं के बाद प्रदेशभर में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं ने फायर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले कई होटल, रेस्टोरेंट, क्लब, बार और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील कर दिया था। इनमें अधिकांश के पास फायर एनओसी या पर्याप्त फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं थे।
डीएलबी के नए आदेश के अनुसार, संपत्ति मालिक या संचालक संबंधित नगरीय निकाय में आवेदन कर अपनी सील की गई बिल्डिंग को डी-सील करवा सकेगा। इसके लिए 10 रुपए प्रति वर्गफीट या अधिकतम 50 हजार रुपए तक की निर्धारित पेनल्टी जमा करानी होगी। आवेदन के बाद निकाय को तीन दिन के भीतर डी-सील की कार्रवाई करनी होगी।
यदि तीन दिन के भीतर भवन डी-सील नहीं किया जाता है, तो आवेदक चौथे दिन स्वायत्त शासन निदेशालय के निदेशक के समक्ष अपील कर सकता है।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि डी-सील होने के बावजूद भवन में किसी प्रकार की कॉमर्शियल गतिविधि की अनुमति नहीं होगी। रेस्टोरेंट, होटल, क्लब, बार या अन्य व्यवसायिक संचालन पूरी तरह बंद रहेंगे। यदि इस अवधि में किसी भवन में व्यावसायिक गतिविधि संचालित होती पाई गई तो उसे तुरंत दोबारा सील कर दिया जाएगा।
भवन मालिक को डी-सील होने के बाद 30 दिन के भीतर सभी आवश्यक फायर सेफ्टी उपकरण और फायर फाइटिंग सिस्टम स्थापित करने होंगे। इसके बाद नगरीय निकाय की फायर सेफ्टी विंग द्वारा निरीक्षण कराया जाएगा। सभी मानकों के अनुरूप पाए जाने पर फायर एनओसी जारी की जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि 30 दिन के भीतर फायर सुरक्षा संबंधी सभी व्यवस्थाएं पूरी नहीं की गईं, तो संबंधित भवन को दोबारा सील करने की कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार के इस फैसले को उन भवन मालिकों के लिए राहत माना जा रहा है, जिनकी संपत्तियां फायर सुरक्षा मानकों की कमी के कारण सील की गई थीं। हालांकि फायर सुरक्षा नियमों का पालन करना अब भी अनिवार्य रहेगा।