राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब लगातार उग्र होता जा रहा है। जयपुर के शहीद स्मारक पर हजारों शिक्षक अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शन कर रहे शिक्षक सरकार से जल्द ट्रांसफर नीति लागू करने और वर्षों से लंबित तबादलों पर फैसला लेने की मांग कर रहे हैं। इस बीच आंदोलन ने नया मोड़ तब ले लिया, जब एक शिक्षक ने आत्म*दाह की चेतावनी दे दी और धरना स्थल पर पुलिस के पहुंचते ही शिक्षकों ने राष्ट्रगान गाना शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से तबादलों की मांग की जा रही है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि धरना समाप्त कराने के लिए प्रशासन ने बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं बंद कर दीं, जिससे विशेष रूप से महिला शिक्षिकाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
धरने के दौरान बुधवार देर शाम पुलिसकर्मी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे तो शिक्षकों ने विरोध जताने के लिए राष्ट्रगान गाना शुरू कर दिया। राष्ट्रगान शुरू होते ही वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को भी सम्मान में रुकना पड़ा। शिक्षकों का यह तरीका सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
आंदोलन के बीच जोधपुर के शिक्षक गणपत चौधरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तय समय तक सरकार उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लेती है तो वह आत्मदाह करने को मजबूर होंगे। उनके इस बयान के बाद आंदोलन को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
बुधवार देर रात शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से मुलाकात की। मुलाकात के बाद मंत्री ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर सकारात्मक है और मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार नई ट्रांसफर नीति तैयार कर रही है, जिसे मुख्यमंत्री और कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।
हालांकि, प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि लिखित आदेश और ठोस कार्रवाई चाहिए। उनका कहना है कि जब तक ट्रांसफर को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा। अब शिक्षक मुख्यमंत्री से सीधी वार्ता के साथ-साथ शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।
फिलहाल जयपुर के शहीद स्मारक पर आंदोलन जारी है और सरकार व शिक्षकों के बीच गतिरोध बना हुआ है। ऐसे में सभी की नजर अब सरकार के अगले फैसले और संभावित वार्ता पर टिकी है।