जोधपुर। जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में एक गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का मामला सामने आया है। सामान्य प्रसव के बाद भर्ती एक 24 वर्षीय प्रसूता को गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ा दिया गया। आरोप है कि महिला का ब्लड ग्रुप O पॉजिटिव होने के बावजूद उसे B पॉजिटिव ब्लड ट्रांसफ्यूज कर दिया गया। गलत रक्त चढ़ाने के तुरंत बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई, कंपकंपी शुरू हो गई, यूरिन में खून आने लगा और बाद में पेशाब बंद हो गया। हालत गंभीर होने पर उसे महात्मा गांधी अस्पताल (एमजीएच) रेफर किया गया, जहां आईसीयू में उसका इलाज जारी है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अस्पताल में भर्ती दो महिलाओं का नाम एक जैसा था और संयोग से उनके पतियों के नाम भी समान थे। इसी भ्रम के कारण ब्लड यूनिट की अदला-बदली हो गई और यह गंभीर लापरवाही हुई। फिलहाल अस्पताल प्रशासन पूरे मामले पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहा है।
11 जुलाई को हुआ था प्रसव
प्रसूता धापू भील, निवासी डावरा बावड़ी (जोधपुर), ने 11 जुलाई की सुबह सामान्य प्रसव के जरिए एक पुत्र को जन्म दिया था। प्रसव के बाद खून की कमी (एनीमिया) के कारण उसे उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया। उसी दिन उसे सही तरीके से O पॉजिटिव ब्लड चढ़ाया गया, जिसके बाद उसकी स्थिति सामान्य थी।
लेकिन 12 जुलाई की रात दूसरी बार रक्त चढ़ाने के दौरान कथित रूप से गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ा दिया गया। परिजनों का कहना है कि ब्लड चढ़ते ही महिला को तेज कंपकंपी शुरू हो गई और कुछ ही देर में उसकी हालत लगातार बिगड़ने लगी।
परिजनों का आरोप- ब्लड चढ़ाते ही बिगड़ गई हालत
महिला की सास पप्पू देवी ने बताया कि दूसरी बार ब्लड चढ़ाने के तुरंत बाद धापू की हालत अचानक खराब हो गई। यूरिन बैग में खून आने लगा और बाद में पेशाब पूरी तरह बंद हो गया। इसके बाद अस्पताल ने महिला को महात्मा गांधी अस्पताल रेफर कर दिया।
महिला के पति किशनाराम ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें यह तक नहीं बताया कि गलत ब्लड चढ़ने की वजह से मरीज की हालत बिगड़ी है। उन्हें केवल रेफर करने की जानकारी दी गई।
किडनी पर पड़ा असर, डायलिसिस जारी
महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. फतेह सिंह ने बताया कि गलत ब्लड ट्रांसफ्यूजन के कारण महिला की किडनी प्रभावित हुई और यूरिन आना बंद हो गया। मरीज का लगातार डायलिसिस किया जा रहा है। फिलहाल उसकी हालत में सुधार बताया जा रहा है, लेकिन वह अभी भी आईसीयू में भर्ती है।
जांच के आदेश
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बी.एस. जोधा ने कहा कि मामले की जानकारी मिल चुकी है। पूरे घटनाक्रम की जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
एक साल में तीसरी घटना
जोधपुर के सरकारी अस्पतालों में गलत ब्लड चढ़ाने का यह एक साल के भीतर तीसरा मामला बताया जा रहा है।
पिछले वर्ष अक्टूबर में एम्स जोधपुर में एक मरीज को कथित रूप से बिना जरूरत रक्त चढ़ा दिया गया था, जिसकी बाद में मौत हो गई थी।
नवंबर में महात्मा गांधी अस्पताल में एक बास्केटबॉल खिलाड़ी को गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ाने की कोशिश की गई थी, जिसे मरीज की आपत्ति के बाद तुरंत रोक दिया गया था।
अब उम्मेद अस्पताल में प्रसूता को गलत ब्लड चढ़ाने का मामला सामने आने से अस्पतालों की ब्लड ट्रांसफ्यूजन व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।