दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के नीचे बन रही करीब 4.9 किलोमीटर लंबी मुकुंदरा टनल तेज बारिश के बाद जलभराव को लेकर चर्चा में आ गई है। 10 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश के बाद टनल के अंदर पानी भरने का वीडियो सामने आया है। इसके बाद टनल के ड्रेनेज सिस्टम और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
खास बात यह है कि टनल का काम करीब 95 फीसदी पूरा होने का दावा किया जा रहा है और इसके जल्द शुरू होने की तैयारी है। इससे पहले 8 जुलाई 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के इस हिस्से का निरीक्षण भी किया था।
तेज बारिश के बाद टनल में भरा पानी
10 अगस्त को हुई तेज बारिश के बाद मुकुंदरा टनल के अंदर जलभराव दिखाई दिया। सामने आए वीडियो में सुरंग के एक हिस्से में पानी जमा नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर टनल अभी ट्रैफिक के लिए पूरी तरह शुरू नहीं हुई है और बारिश के दौरान ही यहां पानी भर गया, तो भविष्य में भारी बारिश के समय वाहन चालकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
हालांकि, जलभराव की वास्तविक वजह और इसके स्थायी समाधान को लेकर तकनीकी जांच और संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
4.9 किलोमीटर लंबी है मुकुंदरा टनल
मुकुंदरा टनल की कुल लंबाई करीब 4.9 किलोमीटर है। इसमें लगभग 3.3 किलोमीटर हिस्सा पहाड़ के अंदर बनाया गया है, जबकि करीब 1.6 किलोमीटर हिस्सा कट एंड कवर तकनीक से तैयार किया जा रहा है।
टनल का निर्माण मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। टनल के ऊपर मिट्टी डालकर क्षेत्र को फिर से हरा-भरा बनाने की योजना है, ताकि वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित न हो।
हाईटेक सिस्टम से लैस होगी टनल
मुकुंदरा टनल को आधुनिक सुरक्षा तकनीकों से लैस किया जा रहा है। इसमें AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम, SCADA तकनीक, HD कैमरे और मोबाइल नेटवर्क की सुविधा जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं।
आपात स्थिति में वाहन चालकों से संपर्क के लिए विशेष FM रेडियो सिस्टम की व्यवस्था भी की जा रही है। इसके अलावा टनल में सुरक्षा और निगरानी के लिए आधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं।
न्यू ऑस्ट्रेलियन टनलिंग तकनीक का इस्तेमाल
टनल के निर्माण में न्यू ऑस्ट्रेलियन टनलिंग मैथड (NATM) का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहाड़ के हिस्से को प्रतिदिन करीब 5 से 7 मीटर की गति से काटकर टनल तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब सबसे बड़ा सवाल- जलभराव का स्थायी समाधान क्या?
मुकुंदरा टनल के अंदर बारिश के बाद पानी भरने का मामला सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल इसके ड्रेनेज सिस्टम और जल निकासी की क्षमता को लेकर है।
टनल शुरू होने के बाद अगर भारी बारिश के दौरान इसी तरह जलभराव हुआ तो वाहन चालकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। ऐसे में टनल को यातायात के लिए खोलने से पहले जलभराव की वजह और उसके स्थायी समाधान को लेकर तकनीकी स्तर पर स्पष्टता जरूरी होगी।
फिलहाल निगाहें संबंधित एजेंसियों की जांच और इस जलभराव के बाद उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।