राजस्थान के झुंझुनूं जिले की लाम्बी अहीर ग्राम पंचायत की प्रशासक और पूरे देश में 'हॉकी वाली सरपंच' के नाम से पहचान बना चुकी नीरू यादव ने एक बार फिर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने 8 जुलाई 2026 को केरल के कोच्चि में आयोजित BRICS Women Ministerial Meeting-2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के अपने सफल मॉडल दुनिया के सामने प्रस्तुत किए।

नीरू यादव का यह सफर केवल एक ग्राम पंचायत की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि यदि नेतृत्व दूरदर्शी और जनहितकारी हो तो गांव स्तर पर किए गए छोटे-छोटे नवाचार भी वैश्विक मंच तक पहुंच सकते हैं।

ग्रासरूट्स लीडर के रूप में मिला विशेष सम्मान

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा यूएन वूमेन इंडिया ने नीरू यादव को विशेष रूप से ग्रासरूट्स लीडर और पैनलिस्ट के रूप में आमंत्रित किया। सम्मेलन के पैनल-3 में उन्होंने महिला नेतृत्व, ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन में नवाचारों पर अपने अनुभव साझा किए।

इस दौरान उन्होंने ग्रामीण भारत की चुनौतियों, महिलाओं की भागीदारी और पंचायत स्तर पर किए गए सफल प्रयोगों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने विस्तार से रखा। उनके विचारों को सम्मेलन में मौजूद नीति विशेषज्ञों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने सराहा।

'हॉकी वाली सरपंच' बनने की प्रेरणादायक कहानी

नीरू यादव ने पंचायत का नेतृत्व संभालने के बाद गांव की बेटियों को खेलों से जोड़ने का संकल्प लिया। उन्होंने अपनी स्वयं की सैलरी से आर्थिक सहयोग देकर लड़कियों की हॉकी टीम तैयार करवाई। सीमित संसाधनों के बावजूद बेटियों को खेल के लिए प्रोत्साहित करने की इस पहल ने उन्हें पूरे देश में 'हॉकी वाली सरपंच' की पहचान दिलाई।

आज उनकी यह पहल महिला सशक्तिकरण और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने का एक सफल उदाहरण मानी जाती है।

बर्तन बैंक बना पूरे प्रदेश के लिए मिसाल

गांव में शादियों और सामाजिक आयोजनों के दौरान प्लास्टिक और थर्माकोल के बढ़ते उपयोग को रोकने के लिए नीरू यादव ने 'बर्तन बैंक' की शुरुआत की। इस पहल के तहत पंचायत द्वारा स्टील के बर्तन उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग कम हुआ और गांव स्वच्छता की दिशा में आगे बढ़ा।

इस मॉडल की सफलता को देखते हुए राजस्थान सरकार ने इसे 2025-26 के बजट में पूरे प्रदेश में लागू करने की घोषणा की।

महिला सशक्तिकरण को बनाया प्राथमिकता

नीरू यादव ने गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। इन प्रयासों से कई महिलाओं को स्वयं का रोजगार शुरू करने का अवसर मिला और पंचायत में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी।

'मेरा पेड़, मेरा दोस्त' अभियान से पर्यावरण संरक्षण

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के उद्देश्य से उन्होंने 'मेरा पेड़, मेरा दोस्त' अभियान शुरू किया। इस पहल के तहत ग्रामीणों को पेड़ों से भावनात्मक रूप से जोड़ने का प्रयास किया गया ताकि अधिक से अधिक पौधारोपण हो और उनकी देखभाल भी सुनिश्चित हो सके।

सामाजिक परंपराओं में हरियाली का संदेश

नीरू यादव ने सामाजिक रस्मों को भी पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की अनूठी शुरुआत की। उन्होंने विवाह समारोहों में कन्यादान और मुंह दिखाई जैसी रस्मों के दौरान पौधा भेंट करने की परंपरा शुरू करवाई। इस पहल का उद्देश्य केवल पौधारोपण नहीं बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्थायी सोच विकसित करना है।

11 देशों के प्रतिनिधियों के बीच रखा भारत का मॉडल

कोच्चि में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इंडोनेशिया सहित कुल 11 देशों के मंत्री, नीति निर्माता और विशेषज्ञ शामिल हुए।

सम्मेलन में महिला नेतृत्व, डिजिटल समावेशन, आर्थिक सशक्तिकरण, कौशल विकास और टिकाऊ ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। नीरू यादव ने भारतीय पंचायत प्रणाली और ग्रामीण विकास मॉडल को वैश्विक मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साझा किया मंच

पैनल चर्चा के दौरान नीरू यादव ने विवेक भारद्वाज (सचिव, पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार), शर्मिला मैरी जोसेफ (वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, केरल सरकार) तथा युवा नेतृत्वकर्ता भक्ति शर्मा के साथ मंच साझा किया। इस दौरान उन्होंने जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों और पंचायतों की भूमिका पर अपने अनुभव साझा किए।

नीरू यादव ने कहा— यह पूरे ग्रामीण भारत का सम्मान

इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए नीरू यादव ने कहा,

"यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि झुंझुनूं, राजस्थान और भारत के हर उस गांव का है जहां लोग बदलाव के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। हमारे गांव में किए गए छोटे-छोटे नवाचार आज अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे हैं। यही भारत के ग्रामीण विकास मॉडल और पंचायती राज व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।"

राजस्थान के लिए गर्व का क्षण

नीरू यादव की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि राजस्थान की ग्राम पंचायतों में हो रहे सकारात्मक बदलावों की भी वैश्विक पहचान है। उन्होंने यह साबित किया है कि मजबूत इच्छाशक्ति, नवाचार और जनसेवा की भावना के साथ गांव से भी वैश्विक स्तर पर प्रभाव छोड़ा जा सकता है। उनका यह सफर देशभर के जनप्रतिनिधियों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।