मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से एक बेहद भावुक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। करैरा तहसील के हाजीनगर गांव में रहने वाले बुजुर्ग कल्याण सिंह पाल ने जीते-जी अपनी ही तेरहवीं (मृत्युभोज) का आयोजन कर दिया है।

यह आयोजन 16 मई को तय किया गया है, लेकिन इससे पहले ही इसका निमंत्रण कार्ड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। इस कार्ड ने सिर्फ चर्चा ही नहीं बढ़ाई, बल्कि लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर एक इंसान को इतना अकेला क्यों होना पड़ा कि वह अपनी ही मृत्यु का शोक खुद मना रहा है।

खुद बांट रहे अपनी ‘तेहरवीं’ का कार्ड

आमतौर पर किसी की मृत्यु के बाद परिवार शोक संदेश बांटता है, लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल उलट है। कल्याण सिंह पाल खुद अपने गांव और आसपास के इलाकों में जाकर अपनी तेरहवीं के कार्ड बांट रहे हैं। यह दृश्य लोगों के लिए भावनात्मक रूप से बेहद भारी है।

ग्रामीणों के अनुसार, बुजुर्ग पिछले काफी समय से पारिवारिक उपेक्षा और अकेलेपन का दर्द झेल रहे थे, और इसी दुख ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया।

कार्ड पर लिखी पंक्तियों ने किया भावुक

वायरल हो रहे निमंत्रण कार्ड पर लिखी पंक्तियां किसी के भी दिल को छू लेने वाली हैं—

“मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था,
मेरी कश्ती वहां डूबी, जहां पानी कम था।”

ये शब्द साफ बताते हैं कि उनका दर्द किसी बाहरी दुनिया से नहीं, बल्कि अपने ही रिश्तों से मिला है।

समाज के लिए बड़ा सवाल

इस घटना ने एक बड़ा सामाजिक सवाल खड़ा कर दिया है—क्या आधुनिक जीवन में रिश्तों की अहमियत कम होती जा रही है? जहां एक ओर लोग प्रगति की दौड़ में आगे बढ़ रहे हैं, वहीं पारिवारिक रिश्ते कहीं न कहीं कमजोर होते दिखाई दे रहे हैं।

16 मई को होगा आयोजन

कल्याण सिंह पाल की तेरहवीं का आयोजन 16 मई 2026 को निर्धारित है। गांव में इस आयोजन को लेकर चर्चा तेज है और लोग इसे सिर्फ एक रस्म नहीं बल्कि एक भावनात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं।