गायक हार्दिल पांड्या पर एफआईआर, विरोधाभासी बयानों से बढ़ा विवाद

गायक हार्दिल पांड्या से जुड़ा कानूनी विवाद एफआईआर दर्ज होने के बाद और गंभीर हो गया है। डॉ. ऋतु सिद्धावत द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में एक विवाहित महिला के साथ कथित उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पांड्या के आधिकारिक बयानों और सोशल मीडिया पर दिए गए उनके वक्तव्यों में विरोधाभास सामने आया।

जहां हार्दिल पांड्या सार्वजनिक रूप से इस पूरे मामले को गीत अधिकारों से जुड़ा विवाद बता रहे हैं, वहीं शिकायतकर्ता का कहना है कि यह सिर्फ एक पेशेवर बहस नहीं थी। एफआईआर के अनुसार, घटना के दौरान पांड्या कथित रूप से शराब के नशे में थे और उन्होंने शिकायतकर्ता के पति श्याम सिद्धावत के प्रति अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया।

एफआईआर दर्ज होने में देरी को लेकर भी पांड्या ने सवाल उठाए हैं, लेकिन शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि घटना के करीब दो घंटे के भीतर बोडकदेव पुलिस स्टेशन में आवेदन दिया गया था। बाद में क्षेत्राधिकार के कारण मामला वस्त्रापुर थाने में स्थानांतरित हुआ, जहां प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई।

मामले में सबसे बड़ा सवाल हार्दिल पांड्या के बयानों में अंतर को लेकर उठ रहा है। एक ओर उनकी एफआईआर में बताया गया कि वे दोस्तों के साथ मौके पर मौजूद थे, वहीं बाद में सोशल मीडिया वीडियो में उन्होंने दावा किया कि वे संयोग से वहां पहुंचे और बिना किसी उकसावे के उन पर हमला हुआ।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित उत्पीड़न के बाद विवाद बढ़ा और हाथापाई की स्थिति बनी। आरोप है कि पांड्या ने धमकी भरे इशारे किए और डराने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे शिकायतकर्ता को गंभीर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।

घटना के बाद सोशल मीडिया पर जारी किए गए वीडियो और कथित पेड मीडिया कवरेज को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि इससे कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने और छवि खराब करने की कोशिश की गई।

फिलहाल मामला जांच के अधीन है। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि एफआईआर दोष सिद्ध नहीं करती, लेकिन महिला उत्पीड़न, विरोधाभासी बयान और घटना के बाद के आचरण जैसे मामलों को कानून गंभीरता से देखता है।