बॉलीवुड के सबसे संजीदा, टैलेंटेड और मेथड एक्टर्स में शुमार रणदीप हुड्डा 50 वर्ष के हो गए हैं। पर्दे पर अपने गंभीर और रफ-टफ किरदारों से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले रणदीप की जिंदगी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं रही है। चकाचौंध से दूर जमीन से जुड़े रहने वाले रणदीप का सफर जबरदस्त संघर्ष, अटूट समर्पण और इंसानियत की मिसाल पेश करता है।

ज़मीनी स्तर पर इंसानियत: बाढ़ राहत से लेकर बीच की सफाई तक

ग्लैमर की दुनिया में रहते हुए भी रणदीप हमेशा समाज सेवा में आगे रहे हैं।

  • असम बाढ़ में मदद: हाल ही में असम के शिवसागर जिले में आई भीषण बाढ़ के दौरान रणदीप खुद पानी में उतरे। उन्होंने पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी और रेलवे स्टेशन के रिलीफ कैंपों में भोजन परोसने और लंगर की व्यवस्था संभाली।

  • पर्यावरण और वन्यजीव प्रेम: मुंबई के वर्सोवा बीच और मीठी नदी सफाई अभियान में वे एक्टिविस्ट अफरोज शाह के साथ सुबह-सुबह कचरा उठाते देखे गए हैं।

  • UN के ब्रांड एंबेसडर: पर्यावरण और जीव संरक्षण के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) ने उन्हें 'जलीय प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण' (CMS) का ब्रांड एंबेसडर बनाया। रणदीप ने कई घोड़ों को गोद लिया है और वे बाघ संरक्षण अभियानों में भी सक्रिय हैं।

ऑस्ट्रेलिया का कड़ा संघर्ष: बर्तन धोए, टैक्सी चलाई

स्कूल के बाद उच्च शिक्षा के लिए मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) गए रणदीप ने वहां मार्केटिंग में बैचलर्स और एचआर/बिजनेस मैनेजमेंट में मास्टर्स की डिग्री ली। हालांकि, इस दौरान आर्थिक तंगी से निपटने के लिए उन्होंने भारी संघर्ष किया:

  • रेस्टोरेंट में बर्तन धोए और वेटर का काम किया।

  • कार वॉशिंग सेंटर में काम किया और देर रात तक टैक्सी चलाई।

  • एक दौर ऐसा भी आया जब तंगी के चलते उन्होंने मेल सेक्स वर्कर (जिगोलो) बनने तक की कोशिश की, लेकिन एक कपल को सर्विस देने की शर्त पर उन्होंने तुरंत इनकार कर दिया।

बॉलीवुड डेब्यू और 4 साल का वो एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट

भारत लौटकर एयरलाइन में जॉब के साथ थिएटर कर रहे रणदीप पर मशहूर डायरेक्टर मीरा नायर की नजर पड़ी। उन्होंने रणदीप को फिल्म 'मानसून वेडिंग' (2001) में राहुल चड्ढा के रोल में कास्ट किया।

डेब्यू के बाद रामगोपाल वर्मा ने उनके साथ 35,000 रुपये महीने का एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट साइन किया, जिसके तहत वे किसी अन्य बैनर के साथ काम नहीं कर सकते थे। फिल्म टलती गई और 4 साल तक उनका करियर रुक गया। साल 2005 में आई फिल्म 'D' फ्लॉप रही और रणदीप के शुरुआती साल भारी नुकसान में चले गए।

करियर का टर्निंग प्वाइंट और मेथड एक्टिंग का जुनून

साल 2010 में आई मिलन लुथरिया की फिल्म 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' रणदीप के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट बनी। एसीपी विल्सन के किरदार ने उन्हें नई पहचान दी। इसके बाद 'साहब बीवी और गैंगस्टर', 'जन्नत 2' और 'जिस्म 2' जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी धाक जमाई।

  • फिल्म 'हाईवे' (2014): महावीर भाटी के किरदार के लिए वे बिना मेकअप घंटों तेज धूप में लेटे रहते थे ताकि स्किन सच में सनबर्न हो जाए। चेहरे पर थकान दिखाने के लिए वे कई बार पूरी वोदका की बोतल पी लेते थे।

  • फिल्म 'मैं और चार्ल्स' (2015): शातिर क्रिमिनल चार्ल्स शोभराज की बॉडी लैंग्वेज समझने के लिए रणदीप नेपाल की काठमांडू सेंट्रल जेल पहुंचे और असली शोभराज से मुलाकात की।

'बैटल ऑफ सारागढ़ी' का अधूरा सपना

रणदीप का सबसे दर्दनाक किस्सा फिल्म 'बैटल ऑफ सारागढ़ी' से जुड़ा है। हवलदार ईशर सिंह के किरदार के लिए उन्होंने स्वर्ण मंदिर में कसम खाई थी कि फिल्म पूरी होने तक बाल और दाढ़ी नहीं कटवाएंगे। 3 साल तक उन्होंने अपने बाल बढ़ाए रखे और कोई दूसरी फिल्म नहीं की। लेकिन बजट दिक्कतों के कारण फिल्म डिब्बाबंद हो गई और उसी विषय पर 'केसरी' रिलीज हो गई। बाद में रणदीप ने गुरुद्वारे जाकर कसम पूरी न होने के लिए माफी मांगी और अपने बाल कटवाए।

लव लाइफ: सुष्मिता सेन से ब्रेकअप ने बदली जिंदगी

साल 2006 में फिल्म 'कर्मा और होली' के सेट पर रणदीप की मुलाकात पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन से हुई। दोनों ने करीब 3 साल तक एक-दूसरे को डेट किया। रणदीप ने माना कि सुष्मिता से ब्रेकअप उनके जीवन का बड़ा मोड़ था, क्योंकि इसके बाद वे अपने एक्टिंग करियर को लेकर पूरी तरह गंभीर और फोकस हो गए। इसके अलावा उनका नाम नीतू चंद्रा और अदिति राव हैदरी के साथ भी जुड़ा।