पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का किला अब पूरी तरह से ढहने की कगार पर पहुंच गया है। राज्य में विधायक दल में मची भगदड़ के बाद अब दिल्ली के सियासी गलियारे से टीएमसी के लिए सबसे बुरी खबर आ रही है। संसद में टीएमसी के संसदीय दल में बहुत बड़ी टूट पूरी तरह से कन्फर्म हो गई है। पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खुला विद्रोह करते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंप दिया है।

इस बागी लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम टीएमसी की स्टार चेहरा और जादवपुर से सांसद सयानी घोष का है, जिन्होंने खुद इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

लोकसभा स्पीकर को लिखे पत्र में क्या है?

बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। इस पत्र में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को बड़ा झटका देते हुए कहा गया है कि अब अभिषेक बनर्जी की जगह काकोली घोष दस्तीदार टीएमसी संसदीय दल की नई नेता होंगी।

सयानी घोष के अलावा पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख सांसदों में शामिल हैं:

कौन हैं सयानी घोष? जो कभी कहती थीं— 'मैं चड्डी नहीं बनूंगी'

1993 में कोलकाता में जन्मी सयानी घोष बंगाल की एक बेहद मशहूर अभिनेत्री और गायिका हैं। साल 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने राजनीति में एंट्री ली थी। अपनी बोल्ड छवि और बेबाक बयानों के कारण वे हमेशा चर्चा में रहीं।

  • राघव चड्ढा पर कसा था तंज: आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले राघव चड्ढा पर एक रैली के दौरान सयानी ने तीखा तंज कसते हुए कहा था— "मैं चड्ढा नहीं हूं जो 'चड्डी' बन जाऊंगी, घोष हमेशा घोष ही रहेगा।" उनके इस बयान पर बीजेपी ने भारी नाराजगी जताई थी, लेकिन आज राजनीति के बदले समीकरण देखिए कि सयानी खुद उसी बीजेपी को समर्थन देने की तैयारी में हैं।

  • विवादों से पुराना नाता: बंगाल चुनाव के दौरान उनके गाए गाने 'मेरे दिल में है काबा और आंखों में मदीना' को लेकर बीजेपी ने ममता सरकार पर मुस्लिम तुष्टीकरण के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके अलावा साल 2021 में त्रिपुरा चुनाव के दौरान 'खेला होबे' का नारा लगाने पर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। साल 2023 में टीएमसी यूथ विंग की अध्यक्ष रहने के दौरान भर्ती घोटाले में ईडी (ED) ने उनसे 10 घंटे तक पूछताछ भी की थी।

2026 चुनाव में थीं स्टार प्रचारक, सत्ता बदलते ही बदला मन

सयानी घोष साल 2024 में जादवपुर संसदीय क्षेत्र से भारी मतों से जीतकर लोकसभा पहुंची थीं। 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में वे पार्टी की मुख्य स्टार प्रचारक थीं, लेकिन जैसे ही सूबे की राजनीतिक हवा बदली, सयानी घोष और उनके साथी 19 सांसदों का भी मन बदल गया।

विधायकों के बाद अब सांसदों के इस तरह बागी होने से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के सामने अपनी पार्टी के वजूद को बचाने का एक आखिरी और सबसे कठिन संकट खड़ा हो गया है।