जयपुर। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण नवाचार किए हैं और वे किसी भी स्तर पर दोषी नहीं हैं। राठौड़ ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने केवल इसलिए इस्तीफा दिया ताकि प्रधानमंत्री किसी प्रकार की दुविधा में न रहें। उनके अनुसार यह कदम उनके बड़े दिल और जिम्मेदार नेतृत्व को दर्शाता है।

शनिवार को बातचीत में मदन राठौड़ ने विपक्ष के आंदोलन और जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन की आड़ में राष्ट्रविरोधी और उपद्रवी तत्व सक्रिय हो गए हैं।

राठौड़ ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, पुलिस पर पथराव किया और पाकिस्तान जिंदाबाद जैसे नारे लगाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ नारे लगाने वाले वास्तविक छात्र नहीं हो सकते। उनका कहना था कि जब असली छात्रों को इस साजिश का एहसास हुआ तो वे प्रदर्शन से अलग हो गए।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारियों के लिए दुबई और पाकिस्तान से ऑनलाइन ऑर्डर के माध्यम से भोजन भेजा जा रहा था। उन्होंने इसे भारत सरकार को अस्थिर करने की विदेशी साजिश का हिस्सा बताया। हालांकि उन्होंने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है और यहां बांग्लादेश या नेपाल जैसी परिस्थितियां पैदा नहीं की जा सकतीं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए राठौड़ ने कहा कि देश के इतिहास में किसी भी नेता ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना नहीं दिया। उन्होंने राहुल गांधी के इस कदम को बचकाना और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत बताया।

राजस्थान में पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए मदन राठौड़ ने पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में 29 बार पेपर लीक की घटनाएं हुईं और उस समय डोटासरा शिक्षा मंत्री थे। ऐसे में कांग्रेस को इस मुद्दे पर भाजपा से सवाल पूछने का नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें इस विषय पर बोलने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के इन बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है। वहीं, विपक्ष ने भाजपा के इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए खारिज किया है।