नई दिल्ली: इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की दुनिया में व्हीकल-टू-ग्रिड (Vehicle-to-Grid - V2G) तकनीक को अगली बड़ी क्रांति माना जा रहा है। यह एक उन्नत दो-तरफा (Bi-directional) चार्जिंग प्रणाली है, जिसके जरिए इलेक्ट्रिक कारें केवल बिजली लेकर चार्ज ही नहीं होतीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर अपने बैटरी में संग्रहीत अतिरिक्त बिजली को वापस पावर ग्रिड में भी भेज सकती हैं।
V2G तकनीक भविष्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के संतुलन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। खासकर जब बिजली की मांग (Peak Load) अचानक बढ़ जाती है, तब हजारों इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां एक छोटे ऊर्जा भंडार (Energy Storage System) की तरह काम कर सकती हैं और ग्रिड को अतिरिक्त बिजली उपलब्ध करा सकती हैं।
कैसे काम करती है V2G तकनीक?
V2G तकनीक के लिए विशेष प्रकार के बाय-डायरेक्शनल चार्जर की आवश्यकता होती है। जब बिजली की मांग कम होती है, तब वाहन सामान्य रूप से चार्ज होते हैं। वहीं, मांग बढ़ने पर स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम वाहन मालिक की अनुमति के अनुसार बैटरी से सीमित मात्रा में बिजली वापस ग्रिड को भेज देता है। बाद में वाहन को फिर से चार्ज किया जा सकता है।
उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?
इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वाहन मालिक अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी अर्जित कर सकते हैं। इसके अलावा बिजली कटौती की स्थिति में EV की बैटरी घरों या छोटे व्यवसायों के लिए बैकअप पावर स्रोत का काम भी कर सकती है। इससे ऊर्जा का बेहतर उपयोग होगा और बिजली व्यवस्था अधिक स्थिर बनेगी।
बिजली व्यवस्था को मिलेगा सहारा
नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम पर निर्भर करता है। V2G तकनीक इन स्रोतों से बनी अतिरिक्त बिजली को स्टोर करने और जरूरत पड़ने पर उपयोग करने में मदद करेगी। इससे ग्रिड की स्थिरता बढ़ेगी और पारंपरिक बिजली संयंत्रों पर निर्भरता कम हो सकती है।
भविष्य की दिशा
दुनिया के कई देशों में V2G तकनीक पर परीक्षण और पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं। आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ेगी और स्मार्ट ग्रिड का विस्तार होगा, V2G तकनीक ऊर्जा प्रबंधन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। इससे उपभोक्ताओं, बिजली कंपनियों और पर्यावरण—तीनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।