राजस्थान की राजनीति, स्वास्थ्य व्यवस्था, संविदा कर्मचारियों के आंदोलन और स्मार्ट मीटर विवाद ने एक बार फिर प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियों को सामने ला दिया है। बीकानेर में प्रसूताओं की मौत पर स्वास्थ्य मंत्री के बयान से लेकर जयपुर में संविदा नर्सिंगकर्मियों के प्रदर्शन, सीकर में स्मार्ट मीटर लगाने पहुंचे बिजलीकर्मी पर हमले और ब्यावर में सम्राट पृथ्वीराज चौहान की प्रतिमा के अनावरण को लेकर उठे सवाल तक, कई घटनाएं चर्चा का केंद्र बनी रहीं।
स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर मचा राजनीतिक बवाल
बीकानेर जिला अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और किडनी फेल्योर के मामलों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। पत्रकारों के सवाल पर मंत्री की टिप्पणी को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। इस बयान के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, चिकित्सकीय लापरवाही और जिम्मेदारी तय करने को लेकर बहस तेज हो गई।
संविदा नर्सिंगकर्मियों का आंदोलन हुआ तेज
राजधानी जयपुर में संविदा पर कार्यरत नर्सिंगकर्मियों के हटाए जाने के विरोध में आंदोलन तेज हो गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लंबे समय से कम वेतन और दबावपूर्ण परिस्थितियों में काम करने के बावजूद उन्हें अचानक हटाया जा रहा है। एक नर्सिंगकर्मी की आत्महत्या के बाद कर्मचारियों में आक्रोश और बढ़ गया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने भी आंदोलनकारियों का समर्थन किया और सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया।
स्मार्ट मीटर विवाद में बिजलीकर्मी पर हमला
सीकर जिले के राधाकिशनपुरा क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने पहुंचे बिजली विभाग के कर्मचारियों पर हमला हो गया। आरोप है कि एक उपभोक्ता ने लोहे के पाइप से हमला कर कर्मचारी का हाथ तोड़ दिया और उसका मोबाइल भी क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्मार्ट मीटर योजना को लेकर प्रदेश के कई हिस्सों में विरोध के स्वर भी सुनाई दे रहे हैं।
पृथ्वीराज चौहान की प्रतिमा का अनावरण अब भी अधूरा
ब्यावर में वर्षों से स्थापित सम्राट पृथ्वीराज चौहान की प्रतिमा का अब तक अनावरण नहीं हो सका है। इस मुद्दे पर स्थानीय स्तर पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विधायक शंकर रावत ने कहा कि पृथ्वीराज चौहान जैसे महान सम्राट की प्रतिमा का अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे बड़े नेता से कराया जाना चाहिए। हालांकि लंबे समय से प्रतीक्षा के बावजूद प्रतिमा अब भी तिरपाल में ढकी हुई है।
राजस्थान में सामने आए ये चार घटनाक्रम प्रशासनिक व्यवस्थाओं, जनभावनाओं और राजनीतिक रणनीतियों के बीच चल रहे संघर्ष को उजागर करते हैं। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष की सक्रियता और बढ़ने की संभावना है।