"जब लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाए, तो सड़कें खामोश नहीं रहतीं!"
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर इन दिनों ज़बरदस्त हंगामा मचा हुआ है। परीक्षा में धांधली और पेपर लीक विवाद को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के कार्यकर्ताओं और देश भर से आए छात्रों ने मोर्चा खोल रखा है। आंदोलनकारियों की केवल एक ही सबसे बड़ी और सख्त मांग है "केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।" लेकिन आखिर क्यों यह पार्टी सरकार के हर प्रस्ताव को ठुकरा कर सिर्फ इस्तीफे की जिद पर अड़ी है? क्या पीएम मोदी के नए वादों के बाद यह विवाद थमेगा या और भड़केगा? आइए, आसान और चटपटी भाषा में समझते हैं पूरी बात!
1. जंतर-मंतर से संसद तक: क्यों भड़का छात्रों का गुस्सा?
NEET और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुई कथित धांधली को लेकर CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरभ दास के नेतृत्व में दिल्ली में बड़ा आंदोलन शुरू हुआ।
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सोनम वांगचुक का समर्थन: प्रसिद्ध पर्यावरणविद और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन के समर्थन में अनशन पर बैठ गए थे (हालांकि बाद में सरकार के लिखित आश्वासन के बाद उन्होंने अनशन तोड़ा)।
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फास्ट-ट्रैक कोर्ट पर सवाल: जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि पेपर लीक के मामलों के लिए सख्त कानून और 'फास्ट-ट्रैक कोर्ट' बनाए जाएंगे, तो CJP ने इसे खारिज कर दिया। उनका कहना है कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट समस्या का हल नहीं, बल्कि ध्यान भटकाने का तरीका है। असली जवाबदेही शिक्षा मंत्री की बनती है।
2. सीजेपी (CJP) की मुख्य मांगें क्या हैं?
सरकार के साथ न्यूट्रल वेन्यू (कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया) में हुई बैठकों के बावजूद, CJP ने साफ कर दिया है कि वे इन तीन मांगों से पीछे नहीं हटेंगे:
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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा या उन्हें पद से बर्खास्त किया जाए।
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पेपर लीक और परीक्षा के तनाव के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
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परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी सुधार किए जाएं और हिरासत में लिए गए छात्र कार्यकर्ताओं पर दर्ज केस वापस लिए जाएं।
3. यह खबर सोशल मीडिया पर क्यों हो रही है इतनी वायरल?
जैसे ही यह आंदोलन तेज हुआ, इंटरनेट पर भी तरह-तरह की फर्जी खबरें और पुराने वीडियो वायरल होने लगे।
कई सोशल मीडिया हैंडल्स पर बिहार में पुलिस लाठीचार्ज के पुराने वीडियो को CJP के प्रदर्शन का बताकर शेयर किया जाने लगा। हालांकि, फैक्ट-चेकर्स ने तुरंत इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया और बताया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन चल रहा है।
इस घटना ने साबित कर दिया कि देश के युवाओं और छात्रों के बीच यह मुद्दा कितना संवेदनशील और हॉट-टॉपिक बना हुआ है!
4. आगे क्या होगा?
विपक्ष के बड़े नेताओं (जैसे पवन खेड़ा और दिया मिर्जा) ने भी छात्रों के इस रुख का समर्थन किया है। लेकिन सरकार का कहना है कि शिक्षा मंत्री ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पहले ही कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं, इसलिए इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता।
क्या केंद्र सरकार अपने शिक्षा मंत्री का बचाव करती रहेगी, या फिर CJP और देश के लाखों छात्रों के बढ़ते दबाव के आगे सरकार को यह बड़ा फैसला लेना ही पड़ेगा? अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तो क्या CJP इस आंदोलन को पूरे देश में फैलाकर सड़कों पर बड़ा चक्का जाम करेगी? इसका फैसला आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली की सियासत तय करेगी!