दिवाली से पहले पटाखों पर लगे बैन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम सुनवाई की। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि देशभर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि 24 घंटे आतिशबाजी की अनुमति किसी भी हाल में नहीं दी जा सकती। इसके लिए एक निश्चित समय सीमा तय करनी होगी, ताकि लोग त्योहार भी मना सकें और आम जनता को कोई परेशानी भी न हो।
आस्था, स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी
जस्टिस एमएम सुंदरैश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था, जनस्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के बीच एक उचित संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। अदालत ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को पटाखों में इस्तेमाल होने वाले बेरियम की जांच, ध्वनि सीमा (डेसिबल लेवल) तय करने और उनके फायर टेस्टिंग के लिए अतिरिक्त समय दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 15 अक्टूबर को की जाएगी।
'नेक्स्ट-जेनरेशन ग्रीन क्रैकर्स' को मिल सकती है सशर्त मंजूरी
सुनवाई के दौरान, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट में एक महत्वपूर्ण नोट पेश किया। इसमें 'नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंट ग्रीन क्रैकर्स' (आधुनिक और कम प्रदूषण वाले पटाखे) को कुछ खास शर्तों के साथ छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है।
इन खास पटाखों को CSIR-NEERI (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च-नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) के सहयोग से विकसित किया गया है। नए फॉर्मूले से बने इन पटाखों की खासियत यह है कि इनमें प्रदूषण कम करने के लिए बेरियम साल्ट का इस्तेमाल बेहद कम किया गया है।
निर्माताओं के लिए कड़े नियम और ध्वनि सीमा तय
सरकार की ओर से पेश किए गए नोट में साफ किया गया है कि इन विशेष ग्रीन पटाखों को बनाने की अनुमति केवल लाइसेंस प्राप्त निर्माताओं को ही दी जाएगी। इसके लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा:
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निर्माताओं को तय शोर सीमा और उत्सर्जन व सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
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इन पटाखों के लिए अधिकतम शोर की सीमा 125 dB(AI) से 145 dB(C) पीक के बीच तय की गई है।
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इन पटाखों में किसी भी प्रकार के प्रतिबंधित रसायनों (Banned Chemicals) का इस्तेमाल पूरी तरह से वर्जित होगा।
'क्या सिर्फ दिल्ली-NCR को ही साफ हवा का हक है?'
गौरतलब है कि पिछले साल दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 200 के पार चला गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केवल ग्रीन पटाखों की बिक्री और उपयोग को मंजूरी दी थी, वह भी एक तय समय सीमा के भीतर।
अदालत ने तब प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा था कि अगर दिल्ली-एनसीआर के लोगों को स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार है, तो देश के अन्य शहरों के नागरिकों को यह अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए? कोर्ट का मुख्य उद्देश्य परंपराओं को बनाए रखने के साथ-साथ नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा करना है।