बीकानेर की अपर सेशन न्यायालय संख्या-5 ने एक चर्चित हत्याकांड मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए झुंझुनूं निवासी कृष्णपाल सिंह को दोषी करार दिया है। मामला कृष्णपाल की पूर्व पत्नी और एएनएम सुमन चौधरी की हत्या से जुड़ा है। अदालत ने डीएनए रिपोर्ट, कॉल डिटेल और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट माना कि आरोपी ने ही सुनियोजित तरीके से पत्नी की जान ली थी।
तलाक के बाद भी जारी था खौफ का साया अभियोजन पक्ष के अनुसार, सुमन और कृष्णपाल की शादी 2003 में हुई थी। 2011 में सुमन के एएनएम बनने और कृष्णपाल के गबन के मामले में जेल जाने के बाद से दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं, जिसके चलते 2019 में उनका तलाक हो गया। हालांकि, तलाक के बाद भी कृष्णपाल लगातार सुमन का पीछा करता था, उनके साथ मारपीट करता था और उन्हें जान से मारने की धमकियाँ देता था।
घटना का दिन और साले को दी गई धमकी 22 अगस्त 2023 को आरोपी ने सुमन पर पीछे से पत्थर से घातक हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी ने सुमन के भाई (साले) विकास को फोन कर धमकी दी, "सुमन को तो मैंने मार दिया है, अब अगला नंबर तेरा है।" कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) ने अदालत में इस कॉल की पुष्टि की, जो मामले में एक मजबूत कड़ी साबित हुई।
वैज्ञानिक साक्ष्यों ने खोला राज अदालत में जांच के दौरान पुलिस द्वारा बरामद खून से सनी टी-शर्ट और घटनास्थल से मिले पत्थर के नमूने केस के टर्निंग पॉइंट बने। एफएसएल की डीएनए रिपोर्ट में मृतका के खून का मिलान आरोपी के कपड़ों और पत्थर से हुआ। साथ ही, आरोपी के हाथों पर मौजूद चोट के निशानों ने भी उसके अपराध को संदेह से परे साबित कर दिया।
न्यायालय ने इन सभी साक्ष्यों को एक अटूट श्रृंखला मानते हुए आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया है।