टीवी और सोशल मीडिया पर 'बोलो जुबान केसरी' का नारा बुलंद करने वाले बॉलीवुड के दिग्गज सितारे अब कानूनी पचड़े में फंसते दिख रहे हैं। विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने कड़ा रुख अपनाया है। FDA ने बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है।
मामला कथित तौर पर सरोगेट विज्ञापन (Surrogate Advertising) के जरिए राज्य में बैन पान मसाला को प्रमोट करने से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला और FDA ने क्यों लिया एक्शन?
महाराष्ट्र में साल 2012 से ही तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा व पान मसाला पूरी तरह बैन है। इस प्रतिबंध को 13 जुलाई 2026 से अगले एक वर्ष के लिए फिर से बढ़ा दिया गया है।
FDA की जांच का मुख्य बिंदु यह है कि क्या अभिनेता केवल इलायची का विज्ञापन कर रहे हैं, या फिर उसी ब्रांड नेम, स्टाइल और पैकेजिंग के सहारे बैन पान मसाला का अप्रत्यक्ष प्रमोशन किया जा रहा है।
नोटिस में अभिनेताओं को दिए गए मुख्य निर्देश:
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विमल इलायची/पान मसाला के विज्ञापन और प्रमोशन में भाग लेना तुरंत बंद करें।
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सोशल मीडिया से विज्ञापन से जुड़ा सारा प्रमोशनल कंटेंट डिलीट करें।
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विज्ञापन के लिए हुए कॉन्ट्रैक्ट और एग्रीमेंट के दस्तावेज FDA को सौंपें।
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व्यक्तिगत रूप से या वकील/प्रतिनिधि के माध्यम से 15 दिनों में स्पष्टीकरण दें।
क्या होता है सरोगेट विज्ञापन?
सरोगेट विज्ञापन का सीधा मतलब होता है—परोक्ष या छुपा हुआ प्रचार। जब कानून किसी प्रतिबंधित उत्पाद (जैसे शराब, गुटखा या सिगरेट) के सीधे विज्ञापन की इजाजत नहीं देता, तब कंपनियां उसी ब्रांड नेम, लोगो, स्लोगन और पैकेजिंग के साथ किसी वैध उत्पाद (जैसे इलायची, सोडा, म्यूजिक सीडी या मिनरल वाटर) का विज्ञापन करने लगती हैं।
पहले भी ट्रेंड में रहे हैं ऐसे सरोगेट विज्ञापन
विमल पहला ऐसा ब्रांड नहीं है जो जांच के दायरे में आया है। इससे पहले भी कई बड़े ब्रांड्स पर सरोगेट मार्केटिंग के आरोप लगे हैं:
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रजनीगंधा और बाबा इलायची: मुख्य रूप से पान मसाला ब्रांड होते हुए भी इलायची और माउथ फ्रेशनर के नाम से कैंपेन चलाना।
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इंपीरियल ब्लू और रॉयल स्टैग: 'मेन विल बी मेन' और 'मेक इट लार्ज' जैसी टैगलाइन्स के साथ म्यूजिक सीडी और इवेंट्स को प्रमोट करना।
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बैगपाइपर और मैकडॉवेल्स No. 1: शराब के बजाय सोडा के नाम पर बड़े सितारों के साथ कैंपेन चलाना।
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किंगफिशर: बीयर ब्रांड की पहचान को बनाए रखने के लिए मिनरल वाटर और सोडा का विज्ञापन करना।
कानून के उल्लंघन पर क्या हो सकती है कार्रवाई?
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FSSAI एक्ट (धारा 24 और 53): खाद्य सुरक्षा एवं मानक कानून के तहत भ्रामक विज्ञापन पर रोक है। दोषी पाए जाने पर ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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उपभोक्ता संरक्षण कानून (CCPA 2022 गाइडलाइन्स): केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के नियमों के तहत भ्रामक प्रचार या सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट के नियमों के उल्लंघन पर विज्ञापन रोकने और पेनल्टी का प्रावधान है।
तीनों अभिनेताओं के 15 दिनों में जवाब दाखिल करने के बाद FDA यह तय करेगा कि विज्ञापन नियमों के खिलाफ है या नहीं।