भोपाल की एक युवती के लिए शादी का प्रस्ताव ठुकराना बड़ी परेशानी का कारण बन गया। युवती ने उदयपुर निवासी एक युवक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसने AI तकनीक का दुरुपयोग कर उसकी फर्जी तस्वीरें बनाई, नकली शादी और गोद भराई के कार्ड छपवाए तथा उसके घर के पते पर सैकड़ों कैब बुक कराकर उसे और उसके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
मामला अब महिला आयोग तक पहुंच गया है, जहां पीड़िता ने बयान दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की है। महिला आयोग ने भी इस मामले को AI के बढ़ते दुरुपयोग और महिलाओं के खिलाफ साइबर उत्पीड़न का गंभीर उदाहरण माना है।
जीवनसाथी डॉट कॉम पर हुई थी पहचान
पीड़िता के मुताबिक, उसकी बहन ने विवाह के लिए जीवनसाथी डॉट कॉम पर प्रोफाइल बनाई थी। इसी दौरान उसकी बातचीत राजस्थान के उदयपुर निवासी युवक से हुई। परिवार की मौजूदगी में दोनों की मुलाकात भी हुई, लेकिन पहली मुलाकात के बाद युवक का व्यवहार संदिग्ध लगने पर परिवार ने रिश्ता आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।
इसके बाद जुलाई 2025 में युवक का नंबर ब्लॉक कर दिया गया, लेकिन आरोप है कि वह अलग-अलग नंबरों से लगातार कॉल और मैसेज कर संपर्क करने की कोशिश करता रहा।
ब्लॉक होने के बाद शुरू हुई परेशानियां
युवती का आरोप है कि रिश्ता टूटने के बाद युवक ने कई नए मोबाइल नंबरों से संपर्क करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, उसने किसी अन्य व्यक्ति की तस्वीर लगाकर फर्जी प्रोफाइल भी बनाई, ताकि यह पता लगा सके कि युवती किसी अन्य रिश्ते के लिए बातचीत कर रही है या नहीं।
शिकायत मिलने के बाद संबंधित प्रोफाइल को हटा दिया गया, लेकिन उत्पीड़न का सिलसिला जारी रहा।
एक दिन में घर पहुंचीं 500 से ज्यादा कैब
पीड़िता ने बताया कि जनवरी 2026 में उसके नाम और पते का इस्तेमाल कर ओला, ऊबर और रैपिडो जैसी सेवाओं पर लगातार कैब बुक कराई गईं। एक ही दिन में करीब 500 टैक्सी और बाइक उसके घर पहुंच गईं।
बताया गया कि आरोपी लंबी दूरी की राइड बुक करता था, जिससे अधिक कमाई की उम्मीद में दूर-दराज के ड्राइवर भी बुकिंग स्वीकार कर लेते थे। इससे न केवल परिवार बल्कि कैब ड्राइवरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
फर्जी शादी और गोद भराई के कार्ड बांटे
युवती का आरोप है कि आरोपी ने उसकी गोद भराई और शादी के फर्जी निमंत्रण कार्ड भी छपवाए। कार्ड में मेहमानों को चांदी का सिक्का देने जैसी बातों का उल्लेख किया गया, ताकि अधिक लोग कार्यक्रम में पहुंचें।
बाद में ये कार्ड हॉकर के जरिए पूरी कॉलोनी में बांट दिए गए, जिससे परिवार को सामाजिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।
AI से बनाई शादी और हनीमून की तस्वीरें
पीड़िता के अनुसार, शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी ने AI तकनीक की मदद से उसकी शादी और हनीमून की फर्जी तस्वीरें तैयार कीं। इन तस्वीरों को सोशल मीडिया और व्हाट्सएप स्टेटस पर साझा कर वायरल करने का प्रयास किया गया।
महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ AI का दुरुपयोग लगातार बढ़ रहा है और आयोग मामले की जांच कर रहा है।
साइबर एक्सपर्ट ने बताया गंभीर अपराध
साइबर एक्सपर्ट शृंगारिता खरे के अनुसार, किसी व्यक्ति की मॉर्फ्ड या AI जनरेटेड फर्जी तस्वीरें बनाना उसकी निजता का गंभीर उल्लंघन है। इससे व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है और मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है।
उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) में ऐसे मामलों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।
किन धाराओं में हो सकती है कार्रवाई
-
BNS धारा 356 (मानहानि) – 2 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों।
-
BNS धारा 78 (स्टॉकिंग) – पहली बार 3 साल तक की कैद, दूसरी बार 5 साल तक की कैद और जुर्माना।
-
आईटी एक्ट धारा 66E – निजता का उल्लंघन करने पर 3 साल तक की कैद या 2 लाख रुपए तक जुर्माना।
-
आईटी एक्ट धारा 67/67A – आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने पर 3 से 5 साल तक की कैद और जुर्माना।
पीड़ित क्या करें?
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में पीड़ितों को तुरंत:
-
राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
-
साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए।
-
नजदीकी साइबर सेल में शिकायत देनी चाहिए।
-
स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
-
जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।
तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ AI आधारित साइबर अपराधों के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। यह मामला बताता है कि व्यक्तिगत दुश्मनी या प्रतिशोध की भावना में तकनीक का दुरुपयोग किस तरह किसी व्यक्ति के जीवन को प्रभावित कर सकता है।