बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसव के दौरान हुई शारदा नायक की मौत को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल थम गया है। प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच हुई वार्ता के बाद कांग्रेस तथा मृतका के परिजनों ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई लिखित समझौता जारी नहीं किया गया है।
आर्थिक सहायता पर बनी सहमति
कांग्रेस देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने बताया कि उपखंड अधिकारी (SDM) राजेश नायक के साथ हुई वार्ता में प्रशासन ने जनसहयोग के माध्यम से मृतका के परिवार को 25 लाख रुपए की तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
इसके अलावा राज्य सरकार को 50 लाख रुपए की अतिरिक्त आर्थिक सहायता स्वीकृत करने के लिए प्रस्ताव भेजने पर भी सहमति बनी है। प्रशासन ने परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी दिलाने का आश्वासन भी दिया है।
लापरवाही साबित हुई तो होगी कानूनी कार्रवाई
बैठक में यह भी तय किया गया कि परिजनों की ओर से परिवाद प्रस्तुत किए जाने के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच करेगी। यदि जांच में किसी चिकित्सक या अस्पताल कर्मी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया जाएगा।
इस आश्वासन के बाद आंदोलनरत परिजनों और कांग्रेस नेताओं ने धरना समाप्त करने का निर्णय लिया।
चार दिन बाद होगा पोस्टमार्टम
मृतका शारदा नायक का पोस्टमार्टम अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में कराया जाएगा। पति राकेश नायक की सहमति मिलने के बाद पोस्टमार्टम प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
जानकारी के अनुसार चार दिन बाद पोस्टमार्टम किया जाएगा और इसके बाद बुधवार को ही शारदा नायक का अंतिम संस्कार किए जाने की संभावना है।
मजदूर परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
शारदा नायक बीकानेर के श्रीरामसर गांव की निवासी थीं। उनके पति राकेश नायक मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। प्रसव के दौरान हुई मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था।
घटना के बाद परिजन और कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा उचित मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। प्रशासन की ओर से आर्थिक सहायता, नौकरी और निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद फिलहाल यह गतिरोध समाप्त हो गया है।
अब पूरे मामले में पुलिस जांच और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रसूता की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही शामिल थी।