राजस्थान के अजमेर में री-नीट परीक्षा 2026 के नाम पर छात्रों और अभिभावकों से ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जिला पुलिस ने हरियाणा के करनाल से दो बीटेक प्रथम वर्ष के छात्रों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों आरोपी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर सोशल मीडिया पर बेचते थे और अभ्यर्थियों से 10 हजार से 30 हजार रुपये तक वसूलते थे।
शिकायत के बाद हरियाणा पहुंची पुलिस
वृत्ताधिकारी (साउथ) मनीष बड़गूजर ने बताया कि रामगंज थाना क्षेत्र में री-नीट 2026 के फर्जी पेपर के नाम पर धोखाधड़ी की शिकायत मिली थी। दयानंद महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्णा सिंह ने पुलिस को बताया कि कुछ लोग मोबाइल के जरिए परीक्षा का प्रश्नपत्र देने का दावा कर रहे हैं।
पुलिस ने शिकायत में दिए गए मोबाइल नंबरों की लोकेशन, डिजिटल गतिविधियों और बैंकिंग ट्रेल की जांच की। इसके बाद हरियाणा के करनाल पहुंचकर दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में दोनों ने फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर छात्रों से पैसे ऐंठने की बात स्वीकार कर ली।
दो बीटेक छात्र निकले मास्टरमाइंड
पुलिस ने बिहार के मधुबनी निवासी आकाश कुमार (19) और उत्तर प्रदेश के कासगंज निवासी अश्वनी कुमार (19) को गिरफ्तार किया है। दोनों करनाल में बीटेक प्रथम वर्ष के छात्र हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी आकाश ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए यह योजना बनाई थी।
AI से बनाया फर्जी प्रश्नपत्र, सोशल मीडिया पर फैलाया जाल
जांच में सामने आया कि आरोपी ने मई में नीट परीक्षा से जुड़ी चर्चाओं का फायदा उठाते हुए AI की मदद से री-नीट का फर्जी प्रश्नपत्र तैयार किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाकर पेपर का वीडियो अपलोड किया जाता था।
वीडियो देखने वाले छात्रों और अभिभावकों से निजी तौर पर संपर्क कर उन्हें वीडियो कॉल पर कथित प्रश्नपत्र दिखाया जाता था। भरोसा जीतने के बाद आरोपियों द्वारा 10 से 30 हजार रुपये की मांग की जाती थी।
QR कोड से लेते थे भुगतान
आरोपी भुगतान के लिए QR कोड भेजते थे। पैसे मिलने के बाद अभ्यर्थियों को फर्जी प्रश्नपत्र भेज दिया जाता था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस तरीके से कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया।
मोबाइल और बैंक खातों की जांच जारी
पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा यह नेटवर्क कितना बड़ा है।
कॉलेज खर्च के लिए रचा था षड्यंत्र
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्होंने शॉर्टकट से पैसा कमाने की योजना बनाई। आकाश ने AI टूल्स का इस्तेमाल करना सीखा, वीडियो एडिटिंग और ग्राफिक्स तैयार किए तथा परीक्षा नजदीक आते ही फर्जी पेपर बेचने का खेल शुरू कर दिया। हालांकि डिजिटल सबूतों और बैंक अकाउंट के आधार पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
19 जून को दयानंद महाविद्यालय की एक छात्रा ने छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्णा सिंह को बताया कि एक व्यक्ति मोबाइल पर री-नीट का प्रश्नपत्र देने का दावा कर रहा है। सत्यता जांचने के लिए कृष्णा सिंह ने अपने मित्र के मोबाइल से आरोपी से संपर्क किया। आरोपी ने वीडियो कॉल पर कथित प्रश्नपत्र दिखाया और भुगतान के लिए QR कोड भेज दिया। पूरी बातचीत रिकॉर्ड करने के बाद 23 जून को रामगंज थाने में मामला दर्ज कराया गया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के कथित लीक पेपर या प्रश्नपत्र खरीदने के झांसे में न आएं। यदि कोई इस तरह का दावा करता है तो तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को इसकी सूचना दें।