राजस्थान के उदयपुर जिले के वीरवा खुर्द गांव का एक परिवार पिछले कई वर्षों से ऐसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रहा है, जिसने उसकी पूरी जिंदगी बदल दी है। परिवार की दोनों बेटियां—13 वर्षीय जानवी और 10 वर्षीय यानसी—एक अत्यंत दुर्लभ जेनेटिक बीमारी क्रेनियल डिसइनरवेशन सिंड्रोम (Cranial Dysinnervation Syndrome) से पीड़ित हैं।

इस बीमारी के कारण दोनों बच्चियां सामान्य बच्चों की तरह न देख सकती हैं, न सुन सकती हैं और न ही बोल सकती हैं। बड़ी बेटी जानवी की हालत अधिक गंभीर है, जबकि छोटी बेटी यानसी को केवल सीमित दृष्टि है।

जन्म के कुछ महीनों बाद दिखने लगे बीमारी के लक्षण

पिता नरेश चौबीसा बताते हैं कि जानवी जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ दिखाई देती थी, लेकिन कुछ महीनों बाद लगातार रोना, आंखों का लाल होना और अन्य असामान्य लक्षण सामने आने लगे। उदयपुर से अहमदाबाद तक इलाज कराया गया, जहां जांच में पता चला कि बच्ची दुर्लभ जेनेटिक बीमारी से पीड़ित है।

कुछ वर्षों बाद दूसरी बेटी यानसी में भी लगभग यही लक्षण दिखाई दिए। हालांकि समय रहते इलाज मिलने से उसकी आंखों की थोड़ी रोशनी बचाई जा सकी।

इलाज पर खर्च हुए लाखों रुपये, फिर भी नहीं मिला समाधान

परिवार अब तक दोनों बच्चियों के इलाज पर 10 लाख रुपये से अधिक खर्च कर चुका है। डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि इस बीमारी का फिलहाल कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। बच्चियों की देखभाल के लिए पिता को अपनी नौकरी तक छोड़नी पड़ी।

परिवार को केवल दिव्यांग पेंशन का सहारा है, जो इलाज और देखभाल के खर्च के मुकाबले बेहद कम है।

हर पल करनी पड़ती है देखभाल

दोनों बच्चियां अपने दैनिक कार्य भी स्वयं नहीं कर पातीं। उन्हें खाना पेस्ट बनाकर खिलाना पड़ता है और आंखों में नियमित रूप से दवा डालनी पड़ती है, ताकि कॉर्निया सूखने से बच सके। परिवार का कोई सदस्य हमेशा उनके साथ रहता है।

डॉक्टर बोले- दुनिया के गिने-चुने मामलों में शामिल

विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी बेहद दुर्लभ है। इसमें दिमाग से आंख, कान और चेहरे तक जाने वाली नसें सही तरीके से विकसित नहीं हो पातीं। डॉक्टरों का कहना है कि यह भारत के बेहद दुर्लभ मामलों में से एक है और इसका कोई प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है।

तीसरे बच्चे से परिवार को नई उम्मीद

दो बेटियों की गंभीर स्थिति के बावजूद परिवार ने तीसरे बच्चे का फैसला इस उम्मीद के साथ किया कि भविष्य में कोई ऐसा हो जो दोनों बहनों की देखभाल कर सके। डॉक्टरों के अनुसार इस बार बच्चे के स्वस्थ होने की संभावना अधिक है, लेकिन परिवार आज भी हर दिन एक नई उम्मीद और चिंता के साथ जी रहा है।

यह कहानी केवल एक परिवार के संघर्ष की नहीं, बल्कि दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे उन हजारों परिवारों की भी है, जो इलाज, जागरूकता और आर्थिक सहयोग की कमी के बीच हर दिन उम्मीद का दामन थामे हुए हैं।