अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने सरकार और जेल प्रशासन से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने पूछा है कि घटना के समय जेल के सीसीटीवी कैमरों में क्या रिकॉर्ड हुआ, क्या नहीं हुआ और सुरक्षा में चूक के लिए अब तक किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई।
यह आदेश जेल व्यवस्थाओं में सुधार से जुड़े स्वप्रेरित प्रसंज्ञान (सुओ मोटू) मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। कोर्ट ने प्रदेश की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि हाई सिक्योरिटी जेल में भी सीसीटीवी रिकॉर्डिंग नहीं होना और लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था का अभाव बेहद चिंताजनक है।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश की जेलों में लगातार गंभीर घटनाएं सामने आ रही हैं। जेलों में मोबाइल फोन पहुंच रहे हैं, अपराधी गिरोह जेल से संचालित हो रहे हैं और यहां तक कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी जेल से धमकी मिल चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
न्यायमित्र ने उठाए गंभीर सवाल
न्यायमित्र अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने अदालत को बताया कि पहले भी रिपोर्ट में हाई सिक्योरिटी जेलों के कई सीसीटीवी कैमरे खराब होने और कई कैमरों के कनेक्शन तक नहीं होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन सरकार ने उस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
29 जून को हुई थी हत्या
गौरतलब है कि 29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई थी। भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने कथित तौर पर तौलिए से गला घोंटकर जगन की हत्या कर दी थी। ड्यूटी स्टाफ के राउंड के दौरान सेल में जगन का शव मिला था। पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना स्वीकार कर लिया था।
घटना के बाद यह भी सामने आया कि जेल के सीसीटीवी कैमरों में वारदात रिकॉर्ड नहीं हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कैमरे के लेंस पर किसी ने पेस्ट लगा दिया था। इसी को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार और जेल प्रशासन से जवाब मांगा है कि ऐसी सुरक्षा चूक कैसे हुई और इसके लिए किसकी जवाबदेही तय की गई।