राजधानी जयपुर के विश्वकर्मा थाना इलाके से एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां 33 वर्षीय एक सेल्स मैनेजर ने पारिवारिक कलह, बेटी से अलगाव और ससुराल पक्ष की कथित मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली। मृतक जितिन कुमार मल्होत्रा नगर स्थित एक अपार्टमेंट में किराए के फ्लैट में रहते थे, जहां उनका शव फंदे से लटका मिला। घटनास्थल से पुलिस को 4 पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए पत्नी, सास-ससुर और साले को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।

8 महीने पहले ही जयपुर शिफ्ट हुए थे जितिन:

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक जितिन मूल रूप से श्रीगंगानगर जिले के सादुलशहर के रहने वाले थे। वे पिछले करीब आठ महीनों से जयपुर में रहकर विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक निजी फैक्ट्री में सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। 1 अगस्त की सुबह जब परिवार वालों ने उन्हें कई बार फोन किया और कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने जयपुर में रहने वाले परिचितों को फ्लैट पर भेजा। फ्लैट का दरवाजा अंदर से बंद था। इसके बाद तुरंत विश्वकर्मा थाना पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब दरवाजा तोड़ा तो जितिन फंदे से लटके मिले।

4 पन्नों का सुसाइड नोट और गंभीर आरोप:

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और एफएसएल (FSL) की टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए। तलाशी के दौरान कमरे से चार पन्नों का एक सुसाइड नोट बरामद हुआ। नोट में जितिन ने अपनी पत्नी शेफाली के अलावा अपने सास, ससुर और साले पर गंभीर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। मृतक के भाई पार्श्व गिल्होत्रा की लिखित शिकायत के आधार पर विश्वकर्मा थाना पुलिस ने 12 अगस्त को चारों आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (IPC/BNS की संबंधित धाराओं) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

सांवले रंग पर ताने और मकान अपने नाम कराने का दबाव:

दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, शादी के कुछ समय बाद से ही ससुराल वाले जितिन को उनके सांवले रंग को लेकर लगातार ताने मारते थे और नीचा दिखाते थे। इसके साथ ही उन पर अपने माता-पिता से अलग रहने और रहने का मकान पत्नी के नाम ट्रांसफर करने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था। पारिवारिक माहौल लगातार तनावपूर्ण होता चला गया।

बेटी से दूरी और 20 लाख रुपये की मांग का आरोप: मृतक के भाई का आरोप है कि बेटी के जन्म के बाद विवाद और ज्यादा बढ़ गया। आरोप है कि जून 2026 में पत्नी अपनी बेटी को लेकर मायके चली गई और इसके बाद जितिन को अपनी ही बेटी से मिलने और बात करने से पूरी तरह रोक दिया गया। परिजनों का दावा है कि जितिन से बच्ची की बात कराने के बदले 20 लाख रुपये या मकान की मांग की जा रही थी। इतना ही नहीं, ससुराल पक्ष ने पंजाब के मुक्तसर में जितिन और उनके परिवार के खिलाफ झूठा मुकदमा भी दर्ज करवा दिया था।

जुलाई के बाद से बंद थी बेटी से बातचीत: परिजनों के अनुसार, जितिन खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते थे और उन्होंने इस पूरे विवाद और मुकदमों से जुड़े डिजिटल सबूत एक पेन ड्राइव में सुरक्षित रखे थे। भाई ने बताया कि 25 जुलाई को जब उनकी जितिन से बात हुई थी, तब वे बेटी से दूर होने के कारण काफी रोए थे और बेहद तनाव में थे। जुलाई के बाद से उनकी बच्ची से बात पूरी तरह बंद करवा दी गई थी। इसी भारी अवसाद और प्रताड़ना के चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।

पुलिस का बयान:

विश्वकर्मा थाना पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट, पेन ड्राइव और परिजनों द्वारा दी गई शिकायत को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी गई है। मामले में लगाए गए सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।