हरिद्वार: जब पहाड़ों की गोद में आसमान फटने लगे, तो मैदानी इलाकों की धड़कनें बढ़ना तय है। उत्तराखंड के ऊपरी इलाकों में हो रही लगातार मूसलाधार आफत ने हरिद्वार में खौफ का माहौल बना दिया है। पवित्र गंगा नदी रौद्र रूप धारण कर चुकी है और इसका उफनता पानी अब चेतावनी के निशान को छूने की होड़ में है। नदी का यह आक्रामक रुख देखकर पूरे शहर में प्रशासनिक अमला सड़कों पर उतर आया है।

चौकियों पर मुस्तैदी, घाटों पर सन्नाटा करने की तैयारी

पहाड़ों से बहकर आ रहे पानी के प्रचंड वेग ने हरिद्वार के तटीय इलाकों में रहने वालों की रातें हराम कर दी हैं। नदी के जलस्तर में हो रही तेजी से बढ़ोतरी को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन यूनिट और पुलिस पूरी तरह हरकत में आ चुकी है। हरिद्वार क्षेत्र में तैनात सभी फ्लड आउटपोस्ट्स (बाढ़ चौकियों) को 24 घंटे की कड़ी निगरानी पर लगा दिया गया है। लाउडस्पीकर के जरिए तटीय बस्तियों, घाटों और निचले इलाकों में मुनादी कराई जा रही है। हरकी पैड़ी और अन्य प्रमुख स्नान घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों को चेतावनी दी जा रही है कि वे पानी के तेज बहाव के करीब न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर बने रहें।

SDRF अलर्ट पर, कंट्रोल रूम से पल-पल की निगरानी

गंगा के बढ़ते वेग को देखते हुए जल पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF) और राहत-बचाव टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी के आंकड़े और नदी के स्तर पर कंट्रोल रूम से सीधी नजर रखी जा रही है। अगर जलस्तर चेतावनी के निशान को पार करता है, तो निचले इलाकों को तुरंत खाली कराने की आपात योजना भी तैयार है।

अगले कुछ घंटे भारी: क्या धर्मनगरी पर मंडराएगा जल-प्रलय का खतरा?

मौसम विभाग के मुताबिक पहाड़ों में बारिश की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ती नहीं दिख रही। अगर कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्रों) में बारिश का यह सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो गंगा का जलस्तर चेतावनी के आंकड़े को पार कर सीधे खतरे के निशान पर दस्तक दे सकता है। असली सस्पेंस अब यही है—क्या गंगा का यह उफान तटबंधों को लांघकर हरिद्वार के रिहायशी इलाकों में तबाही मचाएगा, या फिर कुदरत थोड़ी मोहलत देगी और पानी का यह विकराल रूप शांत होगा? आने वाला हर गुजरता मिनट अब धर्मनगरी के लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं है!