उदयपुर जिले के झाड़ोल उप कारागृह में कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार का गंभीर मामला सामने आया है। यहां जेलर और जेल प्रहरियों द्वारा कैदियों को पट्टों (बेल्ट या लाठियों) से बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है। यह खुलासा मंगलवार को अतिरिक्त जिला जज (एडीजे) एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुलदीप शर्मा के औचक निरीक्षण के दौरान हुआ। कैदियों ने जज के सामने अपने हाथों, पैरों और पीठ पर लगे गंभीर घाव और चोट के निशान दिखाकर अपनी पीड़ा व्यक्त की।

कैदियों का आरोप है कि जेलर करण गरासिया और कुछ जेल प्रहरी नियमित रूप से उन पर अत्याचार करते हैं। पट्टों से मारपीट के कारण कई कैदियों को गंभीर चोटें आई हैं। कैदियों ने बताया कि यह मारपीट बिना किसी उकसावे के की जाती है और इससे उनका शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

एडीजे कुलदीप शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने तीन प्रभावित कैदियों से लिखित शिकायत ली और उन्हें तुरंत मेडिकल जांच के लिए रेफर कर दिया। इन शिकायतों के आधार पर झाड़ोल थाने में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। जेलर और संबंधित प्रहरियों के खिलाफ विभागीय जांच और सख्त कार्रवाई की सिफारिश उच्च अधिकारियों को भेजी गई है।

एडीजे शर्मा ने साफ कहा, "कैदियों के साथ मारपीट एक गंभीर अपराध है। इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रिपोर्ट जयपुर के उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है और इसमें जेलर व प्रहरियों के खिलाफ नियमों के अनुसार विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।"

दूसरी ओर, जेलर करण गरासिया ने आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया कि कैदी आपस में झगड़ा कर रहे थे। उन्हें शांत करने के लिए केवल "हल्का बल" प्रयोग किया गया था। जब उनसे पूछा गया कि अगर मारपीट हल्की थी तो कैदियों के शरीर पर इतने गंभीर घाव क्यों हैं, तो जेलर ने कहा कि कैदी बात नहीं मान रहे थे, इसलिए उन्हें "समझाने" की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी कहा कि ये कैदी राजसमंद के वांछित अपराधी हैं और जेल में माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे थे।

निरीक्षण के दौरान जेल की कई अन्य गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं:जेल की क्षमता 100 कैदियों की है, लेकिन वर्तमान में यहां लगभग 136 कैदी बंद हैं, यानी ओवरक्राउडिंग की समस्या।बैरक में अधिकांश पंखे खराब पड़े हैं, कुछ बैरक में पंखे ही नहीं लगे हैं।कैदियों को पढ़ने के लिए अखबार, किताबें या कोई अन्य पठन सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती।पानी की टंकी में पर्याप्त आपूर्ति नहीं है, जिससे पीने के पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है।अधिकांश कैदी बाहरी जिलों के हैं और उनके मामले उदयपुर में विचाराधीन नहीं हैं, फिर भी उनकी पेशी न तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हो रही है और न ही व्यक्तिगत रूप से अदालत ले जाया जा रहा है। इससे न्याय में देरी हो रही है।