झुंझुनूं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की सीकर शाखा के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाते हुए बैंक पर 55 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। आयोग ने बैंक को उपभोक्ता से अवैध रूप से वसूली गई राशि ब्याज सहित लौटाने और 25 हजार रुपए उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने के आदेश दिए हैं।

मामला लोन प्री-क्लोजर के दौरान अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने से जुड़ा है। नवलगढ़ निवासी सुभाषचंद्र ने SBI की सीकर शाखा से लोन लिया था और बाद में उसे समय से पहले बंद करवाने का निर्णय लिया।

बैंक ने बकाया से ज्यादा राशि काटी

सुभाषचंद्र जब लोन क्लोज करवाने बैंक पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि कुल बकाया राशि 28,323 रुपए है। बैंक ने उनके बचत खाते से यह राशि काटकर लोन खाता बंद कर दिया।

हालांकि बाद में खाते का विवरण देखने पर पता चला कि वास्तविक बकाया राशि केवल 13,345 रुपए थी। बैंक ने प्री-क्लोजर या प्री-पेमेंट पेनल्टी के नाम पर 14,978 रुपए अतिरिक्त वसूल लिए थे।

शिकायत के बाद भी नहीं मिली राहत

उपभोक्ता ने बैंक अधिकारियों से कई बार शिकायत कर अतिरिक्त वसूली गई रकम लौटाने की मांग की, लेकिन कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

सुनवाई के दौरान बैंक ने दलील दी कि प्री-पेमेंट चार्ज ऋण अनुबंध की शर्तों के अनुसार लिया गया था।

आयोग ने RBI नियमों का हवाला दिया

आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील और सदस्य प्रमेंद्र कुमार सैनी ने बैंक की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के स्पष्ट निर्देश हैं कि व्यक्तिगत ऋणों को समय से पहले चुकाने या फोरक्लोजर करने पर कोई अतिरिक्त प्री-क्लोजर शुल्क नहीं लिया जा सकता।

आयोग ने माना कि SBI का यह कदम सेवा में कमी, अनुचित व्यापार व्यवहार और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।

बैंक को ये आदेश दिए गए

आयोग ने SBI को निर्देश दिए हैं कि:

  • अतिरिक्त वसूले गए 14,978 रुपए उपभोक्ता को लौटाए जाएं।
  • 3 मार्च 2025 से भुगतान की तिथि तक 9% वार्षिक ब्याज भी दिया जाए।
  • मानसिक प्रताड़ना और असुविधा के लिए 55,000 रुपए मुआवजा दिया जाए।
  • कानूनी खर्च के रूप में 7,500 रुपए अलग से दिए जाएं।
  • 25,000 रुपए राजस्थान राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराए जाएं।

दोषी कर्मचारियों से भी हो सकती है वसूली

आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि बैंक प्रबंधन चाहे तो मुआवजा और जुर्माने की राशि उन अधिकारियों या कर्मचारियों के वेतन से वसूल सकता है, जिनकी लापरवाही या गलत कार्रवाई के कारण यह मामला उत्पन्न हुआ। यह फैसला बैंकिंग क्षेत्र में उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।