बाड़मेर: सीमावर्ती बाड़मेर जिले के रेगिस्तानी क्षेत्र के छोटे से गांव गंगासरा के होनहार युवा एवं भारतीय सेना के जाबाज़ सिपाही प्रवीण सिंह धांधू ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार उपलब्धि हासिल करते हुए पूरे राजस्थान का मान बढ़ाया है। प्रवीण सिंह ने पुणे स्थित CME NODE में आयोजित अंडर-23 रोइंग नेशनल चैंपियनशिप में सर्विसेस टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।

राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर के बेहतरीन खिलाड़ियों के बीच प्रवीण सिंह ने अपनी उत्कृष्ट तकनीक, अनुशासन और कठिन मेहनत के दम पर शानदार प्रदर्शन किया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने बेहतरीन तालमेल और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए गोल्ड मेडल जीतकर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती।

रेगिस्तान की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में पले-बढ़े प्रवीण सिंह की सफलता विशेष महत्व रखती है। जहां एक ओर वे भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खेल के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उनकी यह उपलब्धि बताती है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर अभ्यास और मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

इस शानदार प्रदर्शन के आधार पर प्रवीण सिंह का चयन दिसंबर में आयोजित होने वाली एशियन रोइंग चैंपियनशिप के लिए भी हुआ है। इस प्रतियोगिता में वे भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। अब पूरे क्षेत्र को उनसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पदक जीतने की उम्मीद है। यदि वे वहां भी सफल होते हैं तो यह न केवल बाड़मेर बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय होगा।

प्रवीण सिंह की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गांव गंगासरा, बाड़मेर जिले और आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, खेल प्रेमियों तथा सेना से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। लोगों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल उचित अवसर और प्रोत्साहन की है।

प्रवीण सिंह धांधू ने अपनी मेहनत, समर्पण और संघर्ष से यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और हौसले बुलंद हों तो रेगिस्तान का बेटा भी पानी में इतिहास रच सकता है। उनकी सफलता ने क्षेत्र के युवाओं में खेलों के प्रति नया उत्साह और आत्मविश्वास जगाया है। अब सभी की निगाहें दिसंबर में होने वाली एशियन रोइंग चैंपियनशिप पर टिकी हैं, जहां देशवासियों को उनसे एक और स्वर्णिम प्रदर्शन की उम्मीद है।