जयपुर। राजस्थान सरकार ने बालिका शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाली अपनी महत्वाकांक्षी लाडो प्रोत्साहन योजना (Lado Protsahan Scheme) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। योजना के लाभार्थियों को समय पर और पारदर्शी तरीके से भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। इसके तहत अब योजना की दूसरी और आगामी सभी किश्तों का भुगतान स्कूल दर्पण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर की ओर से प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। सरकार का मानना है कि इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और त्रुटिरहित बनेगी तथा पात्र बालिकाओं तक लाभ समय पर पहुंच सकेगा।

नई व्यवस्था में किसकी क्या होगी जिम्मेदारी?

संशोधित एसओपी के अनुसार माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन संचालित निजी विद्यालयों में अध्ययनरत पात्र बालिकाओं की योजनागत प्रविष्टियां जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) के माध्यम से की जाएंगी। वहीं प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले विद्यालयों की प्रविष्टियां जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) द्वारा ऑनलाइन दर्ज की जाएंगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी डेटा का डिजिटल सत्यापन होने के बाद ही किश्तों का भुगतान किया जाएगा, जिससे फर्जी लाभार्थियों और रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियों पर रोक लगाई जा सके।

ऑनलाइन DBT के जरिए मिलेगी राशि

राजस्थान सरकार की इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में जन्म लेने वाली बेटियों को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार बालिका के जन्म पर ₹1.50 लाख का संकल्प पत्र जारी किया जाएगा।

यह राशि सात अलग-अलग किश्तों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे बैंक खातों में भेजी जाएगी। पहली छह किश्तें माता-पिता अथवा अभिभावक के खाते में जमा होंगी, जबकि अंतिम और सबसे बड़ी किश्त बालिका के 21 वर्ष की आयु पूर्ण करने और स्नातक शिक्षा पूरी करने पर उसके स्वयं के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।

क्या है लाडो प्रोत्साहन योजना?

लाडो प्रोत्साहन योजना राजस्थान सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहित करना, शिक्षा को बढ़ावा देना, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों पर रोक लगाना तथा बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना है।

योजना के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आर्थिक अभाव के कारण कोई भी बालिका शिक्षा से वंचित न रहे और उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को बेहतर बना सके।

किस्तों का पूरा विवरण

योजना के अंतर्गत मिलने वाली अनुमानित राशि इस प्रकार है—

  • जन्म पर (संस्थागत प्रसव) – ₹2,500
  • 1 वर्ष पूर्ण होने एवं पूर्ण टीकाकरण पर – ₹2,500
  • कक्षा 1 में प्रवेश पर – ₹4,000
  • कक्षा 6 में प्रवेश पर – ₹5,000
  • कक्षा 10 में प्रवेश पर – ₹11,000
  • कक्षा 12 में प्रवेश पर – ₹25,000
  • स्नातक पूर्ण करने एवं 21 वर्ष की आयु पर – ₹1,00,000

इस प्रकार कुल सहायता राशि लगभग ₹1.50 लाख तक पहुंचती है।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ?

योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ निर्धारित पात्रताएं तय की गई हैं—

  • लाभार्थी बालिका राजस्थान की मूल निवासी हो।
  • बालिका का जन्म सरकारी या अधिकृत स्वास्थ्य संस्थान में हुआ हो।
  • परिवार की पहली दो जीवित संतानों तक ही योजना का लाभ मिलेगा।
  • सभी आवश्यक दस्तावेज और बैंक खाता विवरण उपलब्ध होना अनिवार्य है।

जरूरी दस्तावेज

योजना का लाभ लेने के लिए निम्न दस्तावेज आवश्यक हैं—

  • जन आधार कार्ड
  • आधार कार्ड
  • मूल निवास प्रमाण पत्र
  • बालिका का जन्म प्रमाण पत्र
  • बैंक खाते की पासबुक
  • विद्यालय संबंधी दस्तावेज (आवश्यकतानुसार)

बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण को मिलेगा बल

राजस्थान सरकार का मानना है कि नई ऑनलाइन व्यवस्था से योजना के संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभार्थियों को समय पर राशि प्राप्त होगी। स्कूल दर्पण पोर्टल के जरिए भुगतान प्रक्रिया डिजिटल होने से रिकॉर्ड प्रबंधन भी आसान होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो यह न केवल बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देगी, बल्कि बेटियों के प्रति समाज की सोच में भी सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।