राजस्थान के फलौदी जिले में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस हादसे के बाद सबसे ज्यादा टूट चुकी हैं 65 वर्षीय सीता देवी, जिन्होंने एक दिन पहले ही अपने बेटे गेनाराम से कहा था कि बहू पुष्पा को कुछ दिन उनके पास छोड़ दे ताकि वह उसकी सेवा कर सकें। लेकिन बेटे ने जल्द लौटने का भरोसा दिया और अगले ही दिन पूरा परिवार मृत मिला।
सीता देवी की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। वह कहती हैं, "अगर पता होता कि बेटे की लाश आएगी, तो उसे कभी वापस नहीं जाने देती।"
एक दिन पहले कुलदेवी के दर्शन करने पहुंचे थे
29 जून को गेनाराम अपनी पत्नी पुष्पा के साथ बीठू गांव आया था। उसने मां से कहा कि पुष्पा की तबीयत ठीक नहीं रहती, इसलिए कुलदेवी के दर्शन करवाने लाया हूं। दोनों ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और नारियल चढ़ाया।
मां ने बेटे से कहा कि पुष्पा को कुछ दिन यहीं छोड़ दे ताकि उसकी देखभाल हो सके और डॉक्टर को भी दिखाया जा सके। लेकिन गेनाराम ने कहा कि वह फिर वापस आएगा और तब पत्नी को छोड़ जाएगा।
पत्नी पर साये का था शक
सीता देवी का कहना है कि उनके बेटे को लगता था कि उसकी पत्नी पर किसी बुरी शक्ति का साया है, जिसकी वजह से वह अक्सर बीमार रहती थी। इसी कारण वह कुलदेवी के दर्शन कराने आया था।
रुकने का आग्रह भी ठुकराया
पुष्पा के ममेरे भाई कानाराम ने बताया कि दोनों शाम को उनकी दुकान पर आए थे। उन्होंने नारियल खरीदा और मंदिर गए। कानाराम ने रात रुकने का आग्रह भी किया, लेकिन पुष्पा ने कहा कि बच्चे घर पर अकेले हैं, इसलिए वापस जाना जरूरी है।
अगली सुबह मिला दिल दहला देने वाला मंजर
30 जून की सुबह गेनाराम का छोटा भाई शिवराम खेत पर पहुंचा तो वहां का दृश्य देखकर उसके होश उड़ गए। गेनाराम फंदे पर लटका हुआ था, जबकि पत्नी पुष्पा, 13 वर्षीय बेटी खुशबू और 10 वर्षीय बेटे किशन के शव खाट पर पड़े थे।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई कि गेनाराम ने पहले पत्नी और दोनों बच्चों की हत्या की और फिर खुद फंदे से लटक गया। हालांकि, मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
अब बूढ़े कंधों पर दो और जिम्मेदारियां
इस दर्दनाक घटना के बाद सीता देवी पूरी तरह टूट चुकी हैं। उनके 70 वर्षीय पति जोधाराम कई वर्षों से लकवाग्रस्त हैं और हृदय रोग से भी पीड़ित हैं। वहीं सबसे छोटा बेटा जन्म से मानसिक रूप से दिव्यांग है। दोनों की देखभाल अब अकेले सीता देवी के कंधों पर है।
एक तरफ बेटे, बहू और दो मासूम पोते-पोती को खोने का गहरा दुख, तो दूसरी तरफ बीमार पति और दिव्यांग बेटे की जिम्मेदारी। इस हादसे ने एक मां से उसका पूरा संसार छीन लिया है।