राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में स्थापित एचआरआरएल (HPCL Rajasthan Refinery Limited) की बहुप्रतीक्षित ग्रीनफील्ड रिफाइनरी आखिरकार राष्ट्र को समर्पित होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन करेंगे। करीब डेढ़ दशक के लंबे इंतजार, राजनीतिक उतार-चढ़ाव और तकनीकी चुनौतियों के बाद तैयार हुई यह रिफाइनरी राजस्थान के औद्योगिक और आर्थिक विकास में नया अध्याय जोड़ने जा रही है।

15 साल का लंबा सफर, अब होगा सपना साकार

साल 2012 में शुरू हुई इस परियोजना का सफर आसान नहीं रहा। इस दौरान दो बार शिलान्यास हुआ, उद्घाटन की तारीखें बदलीं और भूमि अधिग्रहण को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आए। हाल ही में 21 अप्रैल को प्रस्तावित उद्घाटन कार्यक्रम भी रिफाइनरी की सीडीयू-वीडीयू यूनिट में आग लगने की घटना के कारण स्थगित करना पड़ा था। अब 4 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी इसका औपचारिक उद्घाटन करेंगे।

देश की सबसे आधुनिक ग्रीनफील्ड रिफाइनरी

पचपदरा रिफाइनरी की क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) है। यह देश की पहली ऐसी अत्याधुनिक रिफाइनरी है, जिसे BS-6 मानक के अनुरूप विकसित किया गया है। इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) लगभग 17 है, जो इसे भारत की सबसे उन्नत हाई-कन्वर्जन रिफाइनरियों में शामिल करता है।

यह रिफाइनरी दुनिया के किसी भी हिस्से से आने वाले भारी और निम्न गुणवत्ता वाले कच्चे तेल को उच्च गुणवत्ता वाले पेट्रोल, डीजल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों में बदलने की क्षमता रखती है।

HPCL और राजस्थान सरकार की संयुक्त परियोजना

यह परियोजना HPCL की 74 प्रतिशत और राजस्थान सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी वाला संयुक्त उपक्रम है। शुरुआती अनुमान की तुलना में अतिरिक्त लागत बढ़ने के बाद परियोजना का आकार और भी बड़ा हुआ और यह देश की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल हो गई।

लीलाना से पचपदरा तक पहुंची परियोजना

शुरुआत में रिफाइनरी को बायतु के लीलाना गांव में स्थापित किया जाना था। लेकिन भूमि अधिग्रहण में आई कठिनाइयों और जमीन की बढ़ती कीमतों के कारण परियोजना को पचपदरा स्थानांतरित किया गया, जहां पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध थी। इस फैसले के बाद उस समय प्रदेश की राजनीति में भी बड़ा विवाद देखने को मिला था।

अंतरराष्ट्रीय तकनीक से तैयार हुई रिफाइनरी

रिफाइनरी के निर्माण में भारत के साथ अमेरिका, जापान और यूरोप की आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। इसके कंट्रोल सिस्टम, हाई-प्रेशर कंप्रेसर और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स में वैश्विक स्तर की तकनीक अपनाई गई है। वहीं, अधिकांश भारी उपकरण और रिएक्टर भारत में ही तैयार किए गए हैं, जो 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुंद्रा से पचपदरा तक विशेष पाइपलाइन

कच्चे तेल की वैक्सी प्रकृति को ध्यान में रखते हुए गुजरात के मुंद्रा से पचपदरा तक विशेष हीटिंग पाइपलाइन बिछाई गई है। इस पाइपलाइन में आधुनिक हीटिंग स्टेशन और थर्मल इंसुलेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे तेल का तापमान बनाए रखा जा सके और सप्लाई निर्बाध रहे।

राजस्थान बनेगा नया पेट्रोकेमिकल हब

रिफाइनरी के संचालन के बाद राजस्थान केवल कच्चे तेल का उत्पादक राज्य नहीं रहेगा, बल्कि पेट्रोलियम उत्पादों और वैल्यू-एडेड पेट्रोकेमिकल्स जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलिमर के निर्माण का प्रमुख केंद्र बनेगा। इससे प्लास्टिक, केमिकल और डाउनस्ट्रीम उद्योगों में बड़े निवेश की संभावना बढ़ेगी, साथ ही हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित होंगे।